Multi-agency /नई दिल्ली:-पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का सीधा असर अब भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर दिखने लगा है। इस संकट से निपटने और भारतीय निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार, 2 मार्च 2026 को एक महत्वपूर्ण ‘मल्टी-एजेंसी’ बैठक आयोजित की। वाणिज्य सचिव की अध्यक्षता में हुई इस हाइब्रिड बैठक में प्रमुख निर्यातक संगठनों, शिपिंग लाइनों, फ्रेट फारवर्डर्स और विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य समुद्री और हवाई माल ढुलाई में आ रही बाधाओं की समीक्षा करना और संकट के समय व्यापार को गति देने के लिए आकस्मिक योजना तैयार करना था।
निर्यातकों की चिंता: रूट डायवर्जन और बढ़ता खर्च
बैठक के दौरान ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन’ (FIEO) और अन्य व्यापारिक निकायों ने अपनी गंभीर चिंताएं साझा कीं। निर्यातकों का कहना है कि:
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तनाव के कारण खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका जाने वाले जहाजों का आवागमन बाधित हो रहा है।
समय और लागत में वृद्धि: यदि जहाजों को केप ऑफ गुड होप (अफ्रीका के रास्ते) से भेजा जाता है, तो यात्रा के समय में 15 से 20 दिन की बढ़ोतरी होगी, जिससे माल ढुलाई (Freight) दरों में 20-30% तक का उछाल आ सकता है।
बीमा प्रीमियम: युद्ध जैसे हालातों के कारण समुद्री बीमा (Marine Insurance) के प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी की आशंका है, जो छोटे और मध्यम निर्यातकों (MSMEs) के लिए बड़ा झटका होगा।
सरकार का आश्वासन: ‘हम हर बाधा दूर करेंगे’
वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रख रही है। सरकार ने स्पष्ट किया कि:
प्रक्रियात्मक लचीलापन: वास्तविक बाधाओं के मामलों में नियमों में ढील दी जाएगी ताकि दस्तावेज़ीकरण या भुगतान प्रक्रियाओं में देरी के कारण निर्यातकों को नुकसान न हो।
लॉजिस्टिक्स सपोर्ट: पेट्रोलियम, बंदरगाह और जहाजरानी मंत्रालय के साथ मिलकर वैकल्पिक रास्तों और कंटेनरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा: चावल (विशेषकर बासमती) और चाय जैसे उत्पादों के लिए खाड़ी देशों में बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार इन क्षेत्रों को प्राथमिकता देगी।
व्यापार पर प्रभाव के मुख्य आंकड़े
भारत के कुल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इस प्रभावित क्षेत्र से होकर गुजरता है। आंकड़ों के अनुसार, भारत का लगभग 56% व्यापार (अमेरिका, यूरोप और पश्चिम एशिया को मिलाकर) इन समुद्री रास्तों पर निर्भर है। चालू वर्ष 2026 की शुरुआत में शिपिंग दरें कम हो रही थीं, लेकिन अचानक पैदा हुए इस संकट ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है।
अगला कदम और सतर्कता
मंत्रालय ने सभी हितधारकों को सलाह दी है कि वे अपने शिपमेंट की बारीकी से निगरानी करें। आने वाले कुछ दिनों में शिपिंग कंपनियां नई दरों और उपलब्ध रूट्स की घोषणा करेंगी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।