Rupee crashes : 42 पैसे टूटकर 91.50 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद, मिडिल ईस्ट संकट का असर

Rupee crashes /मुंबई:- वैश्विक बाजारों में गहराते तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच भारतीय मुद्रा ‘रुपये’ को सोमवार को बड़ा झटका लगा। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 42 पैसे की भारी गिरावट के साथ 91.50 के रिकॉर्ड निचले स्तर (प्रोविजनल) पर बंद हुआ। यह हाल के महीनों में रुपये की एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट में से एक है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (Forex Market) में सोमवार, 2 मार्च 2026 को रुपये में शुरुआत से ही कमजोरी देखी गई। रुपया 91.23 पर खुला और दिन के दौरान यह 91.65 के सर्वकालिक निचले स्तर तक गोता लगा गया। कारोबार के अंत में यह पिछले बंद स्तर 91.08 के मुकाबले 42 पैसे गिरकर 91.50 पर स्थिर हुआ।

गिरावट के 4 मुख्य कारण

रुपये की इस ‘बदहाली’ के पीछे आर्थिक और भू-राजनीतिक कारकों का मिला-जुला असर रहा:

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: सप्ताहांत में ईरान पर हुए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई है। निवेशकों के बीच डर (Risk Aversion) का माहौल है, जिसके कारण वे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर जैसे सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की ओर भाग रहे हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में आग: भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें 8% उछलकर $78.71 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ी है जिससे रुपये पर दबाव आया है।

शेयर बाजार में हाहाकार: घरेलू शेयर बाजारों में सोमवार को भारी बिकवाली देखी गई। सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर फंड निकाला है।

डॉलर इंडेक्स की मजबूती: दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला ‘डॉलर इंडेक्स’ 0.67% बढ़कर 98.22 के स्तर पर पहुंच गया, जिससे रुपया कमजोर हुआ।

आरबीआई (RBI) का दखल

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) सक्रिय नहीं होता, तो रुपया 92 के पार जा सकता था। माना जा रहा है कि आरबीआई ने 91.46-91.47 के स्तर पर डॉलर बेचकर रुपये की गिरावट को थामने की कोशिश की।

आम जनता पर क्या होगा असर?

महंगाई की मार: कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर माल ढुलाई और दैनिक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा।

विदेश यात्रा और पढ़ाई: डॉलर महंगा होने से विदेश में पढ़ाई कर रहे छात्रों का खर्च बढ़ जाएगा और विदेश घूमना भी महंगा होगा।

इलेक्ट्रॉनिक सामान: मोबाइल, लैपटॉप और अन्य आयातित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना है।

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