Share market/मुंबई- मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) और ईरान पर इजरायली-अमेरिकी हमलों की खबरों ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में सुनामी ला दी। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन निवेशकों में भारी घबराहट (Panic Selling) देखी गई जिसके चलते घरेलू शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। दिनभर बाजार किसी रोलर-कोस्टर की सवारी जैसा झूलता रहा लेकिन अंततः भारी बिकवाली के दबाव में लाल निशान पर बंद हुआ।
बाजार का लेखा-जोखा: सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट
सोमवार को बाजार खुलते ही बिकवाली का दौर शुरू हो गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (BSE Sensex) 1,048 अंक यानी लगभग 1.3% की भारी गिरावट के साथ 80,238 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 (Nifty 50) भी सुरक्षित स्तरों को बनाए रखने में नाकाम रहा और 312 अंक फिसलकर 24,865 पर क्लोज हुआ।
गिरावट के मुख्य कारण: क्यों मचा बाजार में कोहराम?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस बड़ी गिरावट के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण रहे हैं:
ईरान-इजरायल युद्ध का खतरा: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और संभावित पूर्ण युद्ध (Full-scale War) की खबरों ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है। ईरान पर संभावित हमलों ने सप्लाई चेन और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: युद्ध की स्थिति में तेल आपूर्ति बाधित होने के डर से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी आने की आशंका जो भारत जैसे तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली: अनिश्चितता के माहौल में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ गया।
इन सेक्टर्स पर पड़ा सबसे बुरा असर
बाजार में आई इस गिरावट की चपेट में लगभग सभी सेक्टर रहे। बैंकिंग, ऑटो, आईटी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा मार पड़ी। रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट ने इंडेक्स को नीचे धकेलने में बड़ी भूमिका निभाई। हालांकि, अस्थिरता के इस माहौल में सोने की कीमतों में बढ़त देखी जा रही है, क्योंकि निवेशक इसे सुरक्षित निवेश मान रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय: क्या यह निवेश का सही समय है?
बाजार के जानकारों का मानना है कि जब तक मिडिल ईस्ट के हालात सामान्य नहीं होते बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट लंबी चल सकती है, जबकि कुछ इसे एक ‘करेक्शन’ मान रहे हैं और लंबी अवधि के निवेशकों को “बाय ऑन डिप” (गिरावट में खरीदारी) की सलाह दे रहे हैं।