Archive link /मुंबई:-दुनिया भर में किताबों और अकादमिक लेखों को मुफ्त में उपलब्ध कराने के लिए चर्चित सर्च इंजन अन्ना का पुरालेख इस वक्त अपने सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार पोर्टल का एक और महत्वपूर्ण वेब एड्रेस (URL) ब्लॉक कर दिया गया है। यह कार्रवाई तब हुई है जब पोर्टल ने हाल ही में संगीत स्ट्रीमिंग दिग्गज स्पॉटिफाई से चुराए गए करोड़ों गानों का डेटा सार्वजनिक करने की घोषणा की थी, जिससे संगीत उद्योग में हड़कंप मच गया था।
क्या है ताज़ा मामला?
हाल ही में उपयोगकर्ताओं ने पाया कि अन्ना का पुरालेख का प्रमुख डोमेन लिंक काम नहीं कर रहा है। इंटरनेट सेवा प्रदाताओं और डोमेन रजिस्ट्रारों ने अदालत के आदेश के बाद इसे ‘सर्वरहोल्ड’ स्टेटस पर डाल दिया है। इसका मतलब है कि अब यह लिंक वैश्विक स्तर पर नहीं खुलेगा। यह पहली बार नहीं है जब पोर्टल को निशाना बनाया गया है। इससे पहले भी इसके कई डोमेन (जैसे .org और .li) ब्लॉक किए जा चुके हैं। लेकिन इस बार की कार्रवाई को सीधे तौर पर स्पॉटिफाई डेटा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।
स्पॉटिफाई डेटा रिलीज पर ‘यू-टर्न’
दिसंबर 2025 में, अन्ना का संग्रह ने दावा किया था कि उसने स्पॉटिफाई से लगभग 8.6 करोड़ संगीत फाइलों और उनके मेटाडेटा (लगभग 300TB डेटा) को ‘स्क्रैप’ (Scrape) कर लिया है। पोर्टल का उद्देश्य इसे एक “संगीत संरक्षण संग्रह” के रूप में मुफ्त में जारी करना था।
हालांकि इस घोषणा के तुरंत बाद Spotify और दुनिया की दिग्गज म्यूजिक कंपनियों (Universal, Sony, Warner) ने पोर्टल के अज्ञात संचालकों के खिलाफ 13 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 1,000 लाख करोड़ रुपये) का विशाल मुकदमा दायर कर दिया। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इतने भारी-भरकम जुर्माने और संभावित जेल की सजा के डर से पोर्टल ने अब इस डेटा को रिलीज करने के अपने वादे से हाथ खींच लिए हैं।
क्यों लिया पोर्टल ने पीछे हटने का फैसला?
पोर्टल ने अपने हालिया बयान में संकेत दिया है कि संगीत उद्योग के वकील उनके पीछे हाथ धोकर पड़े हैं। बयान में कहा गया
“हमने अस्थायी रूप से स्पॉटिफाई फ़ाइलों की रिलीज़ को रोक दिया है। संगीत उद्योग के वकीलों द्वारा पैदा की जा रही अतिरिक्त परेशानियों को झेलना इस वक्त समझदारी नहीं है।”
पायरेसी विशेषज्ञों का कहना है कि किताबों की तुलना में संगीत उद्योग के पास कॉपीराइट लागू करने के अधिक सख्त और एकीकृत तंत्र हैं। यही कारण है कि ‘अन्ना का पुरालेख’, जो अब तक किताबों की पायरेसी में बचा हुआ था, संगीत उद्योग के हमले को नहीं झेल सका।
छाया पुस्तकालयों का भविष्य और प्रभाव
अन्ना का संग्रह केवल एक वेबसाइट नहीं, बल्कि पायरेसी की दुनिया का एक बड़ा सर्च इंजन है जो Z-पुस्तकालय और लिबजेन जैसे अन्य प्लेटफार्मों से डेटा लिंक साझा करता है। गूगल पहले ही इसके 74 करोड़ से अधिक लिंक को अपनी खोज सूची (Search Results) से हटा चुका है। कॉपीराइट धारकों का तर्क है कि यह “खुलेआम चोरी” है जबकि पोर्टल के समर्थक इसे “सूचना के लोकतंत्रीकरण” और ज्ञान को सहेजने का माध्यम बताते हैं।