Earthquake/तेहरान:-मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी तनाव और अमेरिका-इजरायल के साथ बढ़ती सैन्य तनातनी के बीच ईरान से आई एक खबर ने पूरी दुनिया के भूवैज्ञानिकों और रक्षा विशेषज्ञों को चौकन्ना कर दिया है। ईरान के गराश (Gerash) प्रांत में रिक्टर स्केल पर 4.3 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसे एक प्राकृतिक घटना बताया जा रहा है, लेकिन युद्ध के मुहाने पर खड़े इस क्षेत्र में इस भूकंप ने ‘परमाणु परीक्षण’ की अटकलों को हवा दे दी है।
भूकंप या ‘शक्ति परीक्षण’? सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
ईरान का गराश इलाका ऐतिहासिक रूप से सेस्मिक एक्टिविटी (भूकंपीय गतिविधि) के लिए जाना जाता है, लेकिन जिस समय यह भूकंप आया है, वह काफी संवेदनशील है। इजरायल द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले की धमकियों और ईरान की जवाबी कार्रवाई की चेतावनियों के बीच, वैश्विक इंटरनेट पर यह बहस तेज हो गई है कि क्या यह वाकई धरती का हिलना था या ईरान ने जमीन के नीचे कोई गुप्त परमाणु धमाका किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब भी कोई परमाणु परीक्षण होता है तो वह भूकंपीय तरंगें पैदा करता है। हालांकि, प्राकृतिक भूकंप और परमाणु विस्फोट की तरंगों (Seismic Waves) में तकनीकी अंतर होता है जिसे केवल उन्नत सीस्मोग्राफ डेटा से ही समझा जा सकता है।
क्या कहते हैं रक्षा विशेषज्ञ?
रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि ईरान पिछले काफी समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को गति दे रहा है। इजरायल के साथ सीधे संघर्ष की स्थिति में, ईरान पर अपनी ‘डेटरेंस’ (निवारक क्षमता) साबित करने का भारी दबाव है।
लोकेशन की अहमियत: गराश प्रांत की भौगोलिक स्थिति और वहां मौजूद पहाड़ियां किसी भी गुप्त सैन्य गतिविधि के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।
गहराई का खेल: आमतौर पर परमाणु परीक्षण कम गहराई पर होते हैं, जबकि प्राकृतिक भूकंप जमीन के काफी नीचे से शुरू होते हैं। यदि इस भूकंप का केंद्र सतह के बहुत करीब पाया जाता है, तो संदेह और गहरा सकता है।
राजनीतिक संदेश: अगर यह एक परीक्षण है, तो यह अमेरिका और इजरायल के लिए एक सीधा संदेश है कि ईरान अब एक परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्र बनने की दहलीज पार कर चुका है।
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और कूटनीतिक चिंताएं
वजह चाहे जो भी हो—चाहे वह कुदरत का कहर हो या इंसान की बनाई तबाही—इस घटना ने क्षेत्र में आग में घी डालने का काम किया है। इजरायली खुफिया एजेंसियां और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) निश्चित रूप से इस डेटा को खंगाल रही होंगी। यदि यह साबित होता है कि यह केवल एक प्राकृतिक भूकंप था तब भी ईरान के लिए चुनौतियां कम नहीं होंगी, क्योंकि आपदा के समय देश की सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। वहीं, अगर इसमें परमाणु परीक्षण का जरा सा भी संकेत मिला, तो यह पूरे मिडिल ईस्ट को एक बड़े और विनाशकारी युद्ध की ओर धकेल सकता है।