Iranian actor : मंदाना करीमी ने डोनाल्ड ट्रंप को बताया ‘ईरान का मुक्तिदाता’, ‘सायरस द ग्रेट’ से की तुलना

Iranian actor/मुंबई:- ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद ईरान में मचे राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, ‘बिग बॉस’ फेम और ईरानी अभिनेत्री मंदाना करीमी का एक बड़ा बयान अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है। मंदाना ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें ईरान का “असली मुक्तिदाता” करार दिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने ट्रंप की तुलना प्राचीन फारस (Persia) के महान शासक ‘सायरस द ग्रेट’ (Cyrus the Great) से कर डाली है।

मंदाना करीमी का साहसी बयान

खामेनेई के निधन के बाद ईरान में एक नए युग की शुरुआत की उम्मीद जताते हुए मंदाना ने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट्स पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “ईरान के लोग दशकों से जिस घुटन और अत्याचार में जी रहे थे, उसका अंत अब करीब है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हमेशा ईरान के दमनकारी शासन के खिलाफ सख्त स्टैंड लिया है। वह आज के समय के ‘सायरस’ हैं, जो ईरानी जनता को गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने का साहस रखते हैं।”

‘सायरस द ग्रेट’ से तुलना के क्या हैं मायने?

मंदाना द्वारा ट्रंप की तुलना सायरस द ग्रेट से करना एक गहरा सांस्कृतिक और राजनीतिक संकेत है।

इतिहास: सायरस द ग्रेट (कोरुश-ए-कबीर) को इतिहास में एक न्यायप्रिय राजा माना जाता है जिन्होंने यहूदियों को बेबीलोन की कैद से मुक्त कराया था और मानवाधिकारों का पहला चार्टर (Cyrus Cylinder) दुनिया को दिया था।

ट्रंप और ईरान: मंदाना का मानना है कि ट्रंप की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ (Maximum Pressure) पॉलिसी और ईरानी शासन पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने ही वहां के लोगों में विद्रोह की अलख जगाई है। वह ट्रंप को एक ऐसे बाहरी नायक के रूप में देख रही हैं जो ईरान में लोकतंत्र की वापसी का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।

खामेनेई के बाद ईरान की स्थिति

अयातुल्ला खामेनेई के निधन के बाद ईरान एक चौराहे पर खड़ा है। एक तरफ कट्टरपंथी सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘महिला, जीवन, स्वतंत्रता’ (Woman, Life, Freedom) आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारी और वैश्विक स्तर पर फैले ईरानी प्रवासी एक नई लोकतांत्रिक सरकार की मांग कर रहे हैं। मंदाना करीमी जो हमेशा से ईरान में हिजाब विरोधी प्रदर्शनों और मानवाधिकारों की समर्थक रही हैं, का यह बयान ईरान के भीतर छिपे असंतोष की आवाज बनकर उभरा है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

मंदाना के इस बयान ने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

समर्थकों का पक्ष: कई ईरानी नागरिकों ने मंदाना के साहस की सराहना की है। उनका कहना है कि ट्रंप ने हमेशा कट्टरपंथियों को चुनौती दी है और वह ईरान के भविष्य के लिए एक उम्मीद की किरण हैं।

आलोचकों का तर्क: वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि किसी विदेशी नेता, विशेषकर ट्रंप की तुलना सायरस जैसे महान ऐतिहासिक व्यक्तित्व से करना अनुचित है। आलोचकों के अनुसार, ईरान का भाग्य वहां की जनता को खुद तय करना चाहिए, न कि किसी बाहरी शक्ति को।

व्हाइट हाउस की चुप्पी और वैश्विक प्रतिक्रिया

वाशिंगटन से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने हमेशा ईरान में ‘शासन परिवर्तन’ (Regime Change) के संकेतों का समर्थन किया है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई के बाद का ईरान अब पहले जैसा नहीं रहेगा और मंदाना करीमी जैसे सार्वजनिक चेहरों के बयान इस बदलाव की आग में घी डालने का काम कर रहे हैं।

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