पटना (बिहार):- बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब उपेंद्र कशवाहा ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस बैठक के बाद यह चर्चा जोर पकड़ने लगी कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा यानी राष्ट्रीय लोक मोर्चा का विलय भाजपा में हो सकता है। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से औपचारिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म है।
बिहार में जल्द ही पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं और इन्हीं में से एक सीट उपेंद्र कुशवाहा की भी खाली हो रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह मुलाकात आगामी चुनावी रणनीति और संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि आरएलएम का बीजेपी में विलय होता है तो इसका असर राज्य की सियासत पर व्यापक रूप से पड़ सकता है।
कुशवाहा पहले भी अलग अलग राजनीतिक गठबंधनों का हिस्सा रह चुके हैं और उनका जनाधार खास तौर पर कुछ सामाजिक वर्गों में प्रभावी माना जाता है। बीजेपी यदि उन्हें साथ लेकर चलती है तो उसे आगामी चुनावों में संगठनात्मक मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर विपक्ष भी इस संभावित कदम पर नजर बनाए हुए है क्योंकि राज्यसभा चुनाव के साथ साथ भविष्य के विधानसभा समीकरणों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
फिलहाल सभी की निगाहें दोनों नेताओं की अगली राजनीतिक चाल पर टिकी हैं। क्या यह मुलाकात महज औपचारिक थी या फिर किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की भूमिका तैयार हो रही है यह आने वाले दिनों में साफ हो पाएगा।