Meerut murder case /मेरठ:-उत्तर प्रदेश के मेरठ में पिछले दिनों मिली एक युवती की लाश ने न केवल पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है बल्कि अब यह मामला एक अंतरराष्ट्रीय और भावनात्मक उलझन में फंसता नजर आ रहा है। दैनिक भास्कर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार, इस केस में यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगे हैं। मृतका की पहचान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब “अर्चिता” बनाम “मुहब्बत” (तुर्कमेनिस्तान की नागरिक) के बीच उलझ गया है।
क्या है पूरा विवाद?
मामला तब शुरू हुआ जब मेरठ पुलिस को एक अज्ञात युवती का शव मिला। पुलिस ने जल्दबाजी में पंचनामा भरकर शव का अंतिम संस्कार कर दिया। पुलिस का दावा है कि वह स्थानीय युवती ‘अर्चिता’ थी। हालांकि, कहानी में ट्विस्ट तब आया जब तुर्कमेनिस्तान की एक महिला ने दावा किया कि वह लाश उसकी बेटी ‘मुहब्बत’ की थी, जो भारत आई थी और लापता हो गई थी।
मां के गंभीर आरोप: “पुलिस ने सच छिपाया”
तुर्कमेनिस्तान से आई मां ने मीडिया और प्रशासन के सामने रोते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने उनसे सच छिपाया। मां का कहना है, “मेरी बेटी का चेहरा और हुलिया उस लाश से मिलता था, लेकिन पुलिस ने मुझे शव देखने तक नहीं दिया और आनन-फानन में उसे जला दिया।” पीड़ित मां का आरोप है कि पुलिस किसी बड़े रैकेट या अपनी गलती को छिपाने के लिए ‘शव को ठिकाने लगाने’ की जल्दबाजी में थी।
अर्चिता या मुहब्बत: डीएनए पर टिका सच
एक तरफ मेरठ का एक परिवार है जो इसे अपनी बेटी अर्चिता की लाश मान रहा है, वहीं दूसरी ओर विदेशी महिला के दावों ने पुलिस की ‘पहचान’ वाली थ्योरी पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
पुलिस का पक्ष: पुलिस का कहना है कि उन्होंने स्थापित प्रक्रिया के तहत पहचान की थी और परिजनों के सुपुर्दगी के बाद ही अंतिम संस्कार हुआ।
विदेशी महिला का दावा: महिला का कहना है कि उसकी बेटी के पास तुर्कमेनिस्तान का पासपोर्ट था और वह मेरठ के कुछ संदिग्ध लोगों के संपर्क में थी।
पुलिस की भूमिका पर उठते सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शव की पहचान को लेकर रत्ती भर भी संदेह था, तो पुलिस ने डीएनए टेस्ट (DNA Test) की रिपोर्ट आने का इंतजार क्यों नहीं किया? बिना पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्यों के शव का दाह-संस्कार करना यूपी पुलिस को कटघरे में खड़ा कर रहा है। क्या पुलिस ने किसी दबाव में आकर फाइल बंद करने की कोशिश की?
रैकेट की आशंका: मानव तस्करी या प्रेम संबंध?
भास्कर की रिपोर्ट इशारा करती है कि यह मामला महज एक हत्या का नहीं, बल्कि मानव तस्करी (Human Trafficking) के किसी बड़े जाल से जुड़ा हो सकता है। यदि मृतका तुर्कमेनिस्तान की नागरिक थी, तो वह मेरठ कैसे पहुंची? उसके वीजा और पासपोर्ट का क्या हुआ? स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में कुछ ऐसे गिरोह सक्रिय हैं जो विदेशी युवतियों को नौकरी या शादी का झांसा देकर बुलाते हैं।