Nishant Kumar Rajya Sabha/पटना:-बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो लंबे समय तक राजनीति में ‘परिवारवाद’ के खिलाफ मुखर रहे हैं अब अपनी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है कि नीतीश कुमार के इकलौते बेटे, निशांत कुमार, आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए जनता दल (यूनाइटेड) के उम्मीदवार होंगे। मंगलवार को पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने इस संभावित नामांकन की पुष्टि की है।इसके साथ ही पार्टी ने पिछड़े वर्गों के बड़े नेता और जननायक कर्पूरी ठाकुर के पुत्र रामनाथ ठाकुर पर भरोसा बरकरार रखते हुए उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है।
निशांत कुमार: पर्दे के पीछे से मुख्यधारा की राजनीति तक
निशांत कुमार अब तक सक्रिय राजनीति से पूरी तरह दूर रहे हैं। पेशे से इंजीनियर निशांत को एक मृदुभाषी और आध्यात्मिक झुकाव वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों से जेडीयू के भीतर उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपने की मांग उठ रही थी। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि निशांत को राजनीति में आना चाहिए ताकि नीतीश कुमार की विकासवादी सोच को आगे बढ़ाया जा सके। राज्यसभा के जरिए निशांत की एंट्री को एक ‘सुरक्षित लॉन्च’ माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार अपनी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए अब पार्टी की कमान और अपनी राजनीतिक विरासत को भरोसेमंद हाथों में सौंपना चाहते हैं।
रामनाथ ठाकुर का कद और पार्टी की रणनीति
रामनाथ ठाकुर को रिटेन करना जेडीयू की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। कर्पूरी ठाकुर को ‘भारत रत्न’ मिलने के बाद बिहार में अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के बीच जेडीयू की पैठ और मजबूत हुई है। रामनाथ ठाकुर पार्टी का एक महत्वपूर्ण चेहरा हैं और उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजकर नीतीश कुमार ने यह संदेश दिया है कि पार्टी अपने पुराने और वफादार सामाजिक आधार को नहीं भूलेगी।
विपक्ष का हमला: क्या टूटेगा ‘परिवारवाद’ का तर्क?
नीतीश कुमार अक्सर लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर ‘परिवारवाद’ को लेकर निशाना साधते रहे हैं। अब निशांत कुमार के नामांकन की खबरों ने विपक्ष को हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने चुटकी लेते हुए कहा है कि “नीतीश जी की नैतिकता अब कहां गई? जो दूसरों को ज्ञान देते थे, वे अब खुद अपने बेटे के लिए रास्ता बना रहे हैं।” हालांकि जेडीयू समर्थकों का तर्क है कि निशांत कुमार एक शिक्षित और योग्य उम्मीदवार हैं और उन्हें पार्टी कार्यकर्ताओं के अनुरोध पर मैदान में उतारा जा रहा है।
जेडीयू के भविष्य पर प्रभाव
निशांत कुमार के सक्रिय राजनीति में आने से जेडीयू के भीतर शक्ति संतुलन बदल सकता है। पार्टी में अभी तक नीतीश कुमार के बाद कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नजर नहीं आ रहा था। निशांत की मौजूदगी से न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह आ सकता है, बल्कि भविष्य के चुनावों में वे पार्टी का मुख्य चेहरा भी बन सकते हैं।