Sonia Criticism/दिल्ली:-ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की एक सैन्य हमले में हुई मौत के बाद भारत की ‘खामोश कूटनीति’ पर घरेलू राजनीति में घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने एक कड़े लेख के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन और एक राष्ट्र प्रमुख की हत्या पर भारत की चुप्पी हैरान करने वाली है। उन्होंने इसे भारत की विदेश नीति की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल बताया है।
‘तटस्थता और कायरता में फर्क’
सोनिया गांधी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि किसी भी देश के संप्रभु नेता की हत्या अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा:
“जब एक विदेशी नेता की लक्षित हत्या (Targeted Killing) पर हमारा देश संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून के बचाव में कुछ नहीं बोलता, तो यह तटस्थ रहना नहीं है। यह अपनी नैतिक और कूटनीतिक जिम्मेदारी से पीछे हटना (Abdication) है।
उन्होंने प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि वह ईरान पर हुए हमलों की अनदेखी कर रहे हैं जो भविष्य में भारत के रणनीतिक हितों के लिए घातक साबित हो सकता है।
संसद में बहस की मांग
कांग्रेस नेता ने सरकार के इस रुख को भारत की ‘गुटनिरपेक्ष’ और ‘स्वतंत्र’ विदेश नीति के इतिहास के विपरीत बताया। उन्होंने मांग की है कि जब संसद का बजट सत्र दोबारा शुरू हो, तो इस “परेशान करने वाली चुप्पी” पर खुली बहस होनी चाहिए। सोनिया गांधी के अनुसार युक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के तहत किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बल प्रयोग वर्जित है और भारत का चुप रहना इस त्रासदी को ‘मौन समर्थन’ देने जैसा है।
कूटनीतिक गलियारों में हलचल
गौरतलब है कि 1 मार्च, 2026 को ईरान ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की थी कि खामेनेई एक संयुक्त अमेरिकी-इजरायली हवाई हमले में मारे गए हैं। इसके बाद से ही दुनिया दो धड़ों में बंट गई है। जहाँ रूस और चीन जैसे देशों ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है, वहीं भारत ने अब तक केवल ‘गहरी चिंता’ व्यक्त की है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। विपक्ष का तर्क है कि भारत के ईरान के साथ ऐतिहासिक और ऊर्जा संबंध रहे हैं, ऐसे में सरकार का यह ‘बैलेंसिंग एक्ट’ (संतुलन बनाने की कोशिश) कूटनीतिक कमजोरी का संकेत है।
पीएम मोदी की हालिया इजरायल यात्रा पर सवाल
सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री की हालिया इजरायल यात्रा के समय पर भी सवाल उठाए। उन्होंने संकेत दिया कि जब क्षेत्र युद्ध की कगार पर है, तब भारत का एक पक्ष की ओर झुकाव वैश्विक स्तर पर देश की ‘विश्वगुरु’ और ‘ग्लोबल साउथ के नेता’ की छवि को नुकसान पहुँचा सकता है।