चंडीगढ़ (पंजाब):- पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने चौबीस साल पुराने चर्चित हत्याकांड मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को बड़ी राहत देते हुए उन्हें बरी कर दिया है। अदालत ने इस मामले में पहले दिए गए सीबीआई अदालत के फैसले की समीक्षा करते हुए कहा कि उपलब्ध सबूत पर्याप्त नहीं हैं इसलिए आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए। अदालत के इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया में एक नया मोड़ आ गया है और इस मामले पर देशभर में चर्चा तेज हो गई है।
यह मामला पत्रकार छत्रपति की हत्या से जुड़ा हुआ था जो कई वर्षों से अदालत में विचाराधीन रहा। जांच एजेंसियों और अदालत में चली लंबी सुनवाई के बाद पहले सीबीआई अदालत ने गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराया था। हालांकि इस फैसले को चुनौती देते हुए उच्च अदालत में अपील की गई थी। अब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पूरे मामले की दोबारा समीक्षा करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूत इतने मजबूत नहीं हैं कि आरोप को पूरी तरह सिद्ध किया जा सके।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आपराधिक मामलों में किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए पुख्ता और स्पष्ट प्रमाण होना जरूरी है। यदि सबूतों में संदेह की गुंजाइश हो तो आरोपी को उसका लाभ दिया जाना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने गुरमीत राम रहीम को बरी करने का निर्णय सुनाया।
इस फैसले के बाद कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जहां अदालत उपलब्ध सबूतों के आधार पर ही फैसला सुनाती है। दूसरी ओर इस मामले से जुड़े लोगों और समाज के कई वर्गों में इस फैसले को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।
फिलहाल अदालत के इस फैसले ने लंबे समय से चल रहे इस विवादित मामले को एक नई दिशा दे दी है और आने वाले समय में इस पर आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा जारी रहने की संभावना है।