पटना (बिहार):- बिहार भाजपा के एमएलसी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता और मोहनिया से विधायक संगीता कुमारी को राजनीतिक विश्लेषक “डार्क हॉर्स” के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि अगर भाजपा किसी चौंकाने वाले फैसले के साथ आगे बढ़ती है, तो इन दोनों नामों पर भी गंभीरता से विचार किया जा सकता है।
दरअसल, भाजपा को अक्सर ऐसे अप्रत्याशित राजनीतिक फैसलों के लिए जाना जाता है, जिनसे राजनीतिक समीकरण अचानक बदल जाते हैं। बिहार में जातीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए पार्टी नए चेहरों पर दांव खेल सकती है। राजेंद्र प्रसाद गुप्ता वैश्य समाज से आते हैं, जो बिहार में भाजपा का एक मजबूत वोट बैंक माना जाता है। वहीं संगीता कुमारी दलित समुदाय से आने वाली एक शिक्षित और सक्रिय महिला नेता हैं। ऐसे में सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति के तहत पार्टी इन चेहरों को आगे ला सकती है।
कौन हैं एमएलसी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता?
अगर राजेंद्र प्रसाद गुप्ता की बात करें तो वे भाजपा संगठन के पुराने और भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं। मूल रूप से सिवान के रहने वाले राजेंद्र गुप्ता लंबे समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। वे वर्तमान में बिहार विधान परिषद के सदस्य (एमएलसी) हैं और सदन में उपनेता की भूमिका भी निभा चुके हैं। इसके अलावा वे उत्तर बिहार भाजपा के संयोजक भी रह चुके हैं। राजेंद्र प्रसाद गुप्ता का शैक्षणिक और प्रशासनिक अनुभव भी काफी मजबूत रहा है। वे पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना में प्रोफेसर और डीन के रूप में कार्य कर चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने बिहार राज्य बीज निगम के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया है। इस पद पर रहते हुए उन्होंने कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई नीतियों और योजनाओं पर काम किया। उन्हें सादगी, संगठन के प्रति समर्पण और जमीनी कार्यकर्ताओं से जुड़ाव के लिए जाना जाता है। पार्टी नेतृत्व समय-समय पर उन्हें अहम जिम्मेदारियां देता रहा है।
मोहनिया से विधायक संगीता कुमार भी चर्चा में
दूसरी ओर, संगीता कुमारी बिहार की मोहनिया विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। यह सीट मोहनिया (कैमूर) क्षेत्र में आती है और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। संगीता कुमारी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल के साथ की थी। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने इसी पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की थी। हालांकि फरवरी 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने राजद छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। उनके इस कदम ने बिहार की राजनीति में काफी चर्चा बटोरी थी।
भाजपा में शामिल होने के बाद वे पार्टी की नीतियों और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजनाओं के समर्थन में सक्रिय नजर आती हैं। 1985 में जन्मी संगीता कुमारी ने रांची विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है और बी.एड. भी किया है। वह विधानसभा में महिलाओं के अधिकार, शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहती हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में सामाजिक संतुलन और नए नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति के तहत भाजपा इन दोनों नेताओं को अहम भूमिका दे सकती है।