Age restrictions/सिडनी:- ऑस्ट्रेलिया ने सोमवार को अपने नए और सख्त ‘ऑनलाइन एज-वेरिफिकेशन’ (उम्र सत्यापन) नियमों को पूरे देश में लागू कर दिया। इन नियमों का उद्देश्य नाबालिगों को पोर्नोग्राफी, अत्यधिक हिंसा और आत्म-हानि जैसी हानिकारक ऑनलाइन सामग्री से दूर रखना है। हालांकि, कानून लागू होते ही इसके दो बड़े प्रभाव सामने आए हैं: पहली, दुनिया की कई बड़ी पॉर्न वेबसाइट्स ने ऑस्ट्रेलिया में अपनी सेवाएं बंद कर दी हैं, और दूसरी, ऑस्ट्रेलियाई यूजर्स के बीच वीपीएन (Virtual Private Network) डाउनलोड करने की होड़ मच गई है।
क्या है नया कानून और क्यों मची हलचल?
ऑस्ट्रेलियाई सरकार के नए नियमों के तहत, अब केवल “मैं 18 वर्ष का हूँ” बटन पर क्लिक करना काफी नहीं होगा। पॉर्न वेबसाइट्स, सर्च इंजन, ऐप स्टोर्स और यहाँ तक कि AI चैटबॉट्स को भी अब यह सुनिश्चित करना होगा कि यूजर वास्तव में 18 वर्ष से ऊपर है। इसके लिए उन्हें सख्त तकनीक जैसे सरकारी आईडी वेरिफिकेशन या फेस-स्कैनिंग (Facial Age Estimation) का उपयोग करना पड़ सकता है।
मुख्य अपडेट्स:
* जुर्माने का डर: जो कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग $34.5 मिलियन) तक का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है।
* दिग्गज साइट्स ने खींचे हाथ: पोर्नहब (Pornhub) की मूल कंपनी ‘Aylo’ ने रेडट्यूब (RedTube) और यू-पॉर्न (YouPorn) जैसी साइट्स को ऑस्ट्रेलिया में पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है। पोर्नहब का एक ‘सेफ-फॉर-वर्क’ (बिना अश्लीलता वाला) वर्जन दिखाया जा रहा है, जिसमें नए रजिस्ट्रेशन बंद कर दिए गए हैं।
वीपीएन बना ‘डिजिटल चोर रास्ता’
जैसे ही वेबसाइट्स ब्लॉक हुईं, ऑस्ट्रेलियाई यूजर्स ने अपनी लोकेशन छिपाने के लिए वीपीएन का सहारा लेना शुरू कर दिया। ऐप स्टोर के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को टॉप 15 सबसे ज्यादा डाउनलोड किए जाने वाले फ्री ऐप्स में से 3 केवल वीपीएन ऐप्स थे।
* वीपीएन – सुपर अनलिमिटेड प्रॉक्सी जैसे ऐप्स डाउनलोड चार्ट में सबसे ऊपर पहुँच गए हैं।
* डिजिटल राइट्स विशेषज्ञों का कहना है कि यह “प्रत्याशित” था, क्योंकि लोग अपनी प्राइवेसी बचाने और सरकारी सेंसरशिप से बचने के लिए इन टूल्स का रुख करते हैं।
सरकार का तर्क: “डिजिटल दुनिया में भी सुरक्षा जरूरी”
ऑस्ट्रेलिया की ई-सेफ्टी कमिश्नर (eSafety Commissioner) जूली इनमैन ग्रांट ने इस कदम का बचाव किया है। उन्होंने कहा, “आज एक बच्चा किसी बार में जाकर शराब नहीं मांग सकता या कैसीनो में नहीं बैठ सकता। हम बस वही सुरक्षा नियम डिजिटल दुनिया में ला रहे हैं।” सरकार का मानना है कि प्राइवेसी की चिंताएं जायज हैं लेकिन बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा सर्वोपरि है।
प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर बहस
आलोचकों और साइबर विशेषज्ञों का तर्क है कि उम्र सत्यापन के लिए सरकारी आईडी या चेहरे के स्कैन की मांग करना नागरिकों के डेटा को जोखिम में डालता है। यदि इन साइट्स का डेटा हैक होता है, तो लाखों लोगों की बेहद निजी जानकारी सार्वजनिक हो सकती है। इसी डर से कई लोग अब कानून का पालन करने के बजाय वीपीएन के जरिए इन प्रतिबंधों को दरकिनार कर रहे हैं।