Arrest order/मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में कानून का पालन कराने वाली पुलिस खुद कानून के शिकंजे में फंसती नजर आ रही है। मुजफ्फरपुर की विशेष एनडीपीएस कोर्ट-2 के न्यायाधीश नरेंद्र पाल सिंह ने एक कड़ा फैसला सुनाते हुए डीएसपी, थानेदार और जांच अधिकारियों (IO) सहित कुल 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। इन पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि वे बार-बार समन और नोटिस भेजे जाने के बावजूद नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े मामलों में कोर्ट में गवाही देने नहीं पहुंच रहे थे।
क्या है पूरा मामला?
यह आदेश दो अलग-अलग महत्वपूर्ण मामलों में आया है। कोर्ट ने पाया कि पुलिसकर्मियों की लगातार अनुपस्थिति के कारण न्यायिक प्रक्रिया न केवल बाधित हो रही है बल्कि वर्षों पुराने गंभीर मामले भी लटके हुए हैं।
1. कुढ़नी का स्मैक और हथियार जब्ती मामला:
पहला मामला कुढ़नी थाना क्षेत्र के गरहुआ चौक से जुड़ा है। करीब चार साल पहले पुलिस ने रौशन कुमार नामक एक युवक को लोडेड कट्टे और 1.920 मिलीग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार किया था। इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट तो दाखिल कर दी, लेकिन जब ट्रायल की बारी आई तो गवाह बने पुलिसकर्मी कोर्ट से नदारद रहने लगे।
2. सदर थाना का चरस और एटीएम फ्रॉड मामला:
दूसरा मामला सदर थाना क्षेत्र का है, जो करीब पांच साल पुराना है। यह मामला चरस की बरामदगी और एटीएम धोखाधड़ी से जुड़ा है। इस केस में भी पुलिसकर्मी गवाही के लिए उपस्थित नहीं हो रहे थे, जिससे केस की सुनवाई आगे नहीं बढ़ पा रही थी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी और आदेश
विशेष कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि गवाहों (विशेषकर पुलिस अधिकारियों) के न आने से आरोपियों को अनुचित लाभ मिल सकता है और न्याय में देरी हो रही है। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि:
* इन सभी 12 पुलिसकर्मियों को 9 मार्च 2026 तक गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाए।
* वारंट तामिला की जिम्मेदारी संबंधित वरीय पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है।
इन अधिकारियों और कर्मियों पर गिरी गाज
जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ वारंट जारी हुआ है उनमें कुढ़नी और सदर थाने के तत्कालीन अधिकारी और सिपाही शामिल हैं। प्रमुख नामों में शामिल हैं:
* मामले के सूचक रघुवीर सिंह
* आईओ (जांच अधिकारी) राजेश कुमार यादव
* सिपाही छोटेलाल सिंह और संजीव कुमार
* गृह रक्षक (होमगार्ड) अरविंद कुमार और धनिक कुमार राणा
इसके अलाव सूची में तत्कालीन डीएसपी और थानेदार का नाम भी शामिल है जो इन मामलों में पर्यवेक्षण या जब्ती के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका में थे।
विभाग की छवि पर सवाल
बिहार में हाल के दिनों में अदालतों ने पुलिस की कार्यशैली पर कई बार सवाल उठाए हैं। एनडीपीएस एक्ट जैसे गंभीर मामलों में, जहाँ सजा के प्रावधान बहुत कड़े होते हैं, पुलिसकर्मियों का गवाही से पीछे हटना न्याय प्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती है। जानकारों का कहना है कि पुलिसकर्मियों के तबादले या काम के बोझ के कारण अक्सर वे कोर्ट नहीं पहुँचते, लेकिन अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस आदेश के बाद मुजफ्फरपुर पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह है कि विभाग अपने ही अधिकारियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करता है या ये अधिकारी गिरफ्तारी से पहले खुद कोर्ट में सरेंडर करते हैं।