Fake AI- Satellite : कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से बनी फर्जी सैटेलाइट तस्वीरों ने भड़काई अमेरिका-ईरान युद्ध की चिंगारी; सोशल मीडिया पर फैला झूठ

Fake AI- Satellite /वॉशिंगटन:-कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की ताकत जहाँ एक ओर दुनिया को बदल रही है वहीं दूसरी ओर युद्ध के मैदान में यह एक खतरनाक हथियार बनकर उभरी है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, सोशल मीडिया पर AI जनित (AI-generated) फर्जी सैटेलाइट तस्वीरों ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी। इन तस्वीरों में कतर स्थित एक प्रमुख अमेरिकी सैन्य बेस को पूरी तरह तबाह दिखाया गया था, जिसे बाद में जांच में पूरी तरह फर्जी पाया गया।

क्या था पूरा मामला?

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ और अन्य चैनलों पर कुछ उच्च-गुणवत्ता वाली सैटेलाइट तस्वीरें वायरल हुईं। इन तस्वीरों के साथ दावा किया गया कि ईरान ने कतर में स्थित अमेरिकी रडार सिस्टम और सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमला कर उन्हें “मलबे के ढेर” में बदल दिया है। देखते ही देखते ये तस्वीरें लाखों बार देखी गईं और कई समाचार आउटलेट्स ने भी बिना जांचे इन्हें साझा करना शुरू कर दिया, जिससे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की आशंका और गहरा गई।

जांच में खुला झूठ: AI की ‘हल्लुसिनेशन’ ने दिया धोखा

जब अंतरराष्ट्रीय डिजिटल जांचकर्ताओं और ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) विशेषज्ञों ने इन तस्वीरों का विश्लेषण किया, तो सच्चाई कुछ और ही निकली। AFP और BBC Verify की रिपोर्ट के अनुसार:

* लोकेशन में हेरफेर: दावा किया गया था कि ये तस्वीरें कतर की हैं, लेकिन वास्तव में ये बहरीन स्थित एक अमेरिकी बेस की पुरानी गूगल अर्थ (Google Earth) तस्वीरों को AI की मदद से बदला गया था।

* तकनीकी खामियां: विशेषज्ञों ने पाया कि तस्वीर में दिखाई गई कारों की कतारें और इमारतों की छाया बिल्कुल वैसी ही थीं जैसी पिछले साल की मूल तस्वीर में थीं। AI ने केवल इमारतों पर “काली राख” और “मलबे” जैसी परतें चढ़ा दी थीं।

* वॉटरमार्क और डिजिटल सुराग: कुछ तस्वीरों में गूगल ऐ द्वारा बनाया गया अदृश्य वॉटरमार्क ‘सिंथआईडी’ भी पाया गया, जो स्पष्ट करता है कि ये तस्वीरें सिंथेटिक मीडिया टूल्स से बनाई गई थीं।

सूचना युद्ध: हथियारों से ज्यादा खतरनाक है प्रोपेगेंडा

रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह “इंफॉर्मेशन वॉरफेयर” (सूचना युद्ध) का एक नया और घातक चरण है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस संघर्ष में, जहाँ मिसाइलें और ड्रोन असली तबाही मचा रहे हैं, वहीं AI से बनी ये तस्वीरें मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और अंतरराष्ट्रीय जनमत को प्रभावित करने का काम कर रही हैं। विशेषज्ञ ताला हगिन के अनुसार, “युद्ध के धुंधलके (Fog of War) में यह पहचानना बहुत मुश्किल हो जाता है कि दुश्मन का हमला सफल रहा या नहीं। ऐसे में AI जनित तस्वीरें भ्रम फैलाकर रणनीतिक फैसलों को गलत दिशा में मोड़ सकती हैं।”

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सख्ती

इस घटना के बाद, एलन मस्क के प्लेटफॉर्म ‘X’ और मेटा (Meta) ने कड़ी चेतावनी जारी की है। अब बिना लेबल वाली AI जनित युद्ध की तस्वीरें या वीडियो पोस्ट करने वाले खातों को विज्ञापन राजस्व से प्रतिबंधित किया जा रहा है और बार-बार उल्लंघन करने पर स्थायी प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *