Jaishankar Gulf alert /नई दिल्ली: पश्चिम एशिया, विशेषकर ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के बादलों ने भारतीय राजनीति के गलियारों में भी हलचल पैदा कर दी है। राज्यसभा में आज उस समय माहौल गरमा गया जब विपक्ष ने मिडिल ईस्ट संकट और वहां फंसे भारतीयों की सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की। हंगामे और नारेबाजी के बीच विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिसके बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा।
विपक्ष का आरोप: “देरी से जागी सरकार”
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी नेताओं ने ईरान-इजरायल संघर्ष का मुद्दा उठाया। विपक्ष का मुख्य आरोप था कि सरकार युद्धग्रस्त क्षेत्रों में फंसे भारतीय कामगारों और छात्रों को निकालने में सुस्ती दिखा रही है। विपक्षी सांसदों ने मांग की कि सरकार केवल बयानों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन की समय सीमा स्पष्ट करे। जब सभापति ने चर्चा को नियमों के तहत लाने की बात कही, तो विपक्ष ने ‘असंतोषजनक जवाब’ का हवाला देते हुए सदन का बहिष्कार (वॉकआउट) कर दिया।
जयशंकर का खुलासा: “जनवरी में ही किया था अलर्ट”
विपक्ष के जाने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सदन को संबोधित किया। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए एक बड़ा खुलासा किया। जयशंकर ने बताया कि भारत सरकार सोई नहीं थी, बल्कि स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए जनवरी में ही खाड़ी देशों (Gulf Countries) में रह रहे भारतीयों के लिए विस्तृत एडवाइजरी और अलर्ट जारी कर दिया गया था उन्होंने कहा, “हमने हवा का रुख पहले ही भांप लिया था। जनवरी के मध्य में ही हमारे दूतावासों को सक्रिय कर दिया गया था और नागरिकों को पंजीकरण कराने व अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई थी। जो लोग आज सवाल उठा रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि कूटनीति शोर मचाकर नहीं, सतर्कता से की जाती है।”
भारत का रुख: शांति और संवाद (Peace & Dialogue)
युद्ध पर भारत की आधिकारिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि भारत किसी भी पक्ष का अंधा समर्थन करने के बजाय ‘शांति के पक्ष’ में खड़ा है।
* संयम की अपील: भारत ने दोनों पक्षों से शत्रुता को तुरंत समाप्त करने और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने का आग्रह किया है।
* मध्यस्थता की गुंजाइश: जयशंकर ने संकेत दिया कि भारत अपने रणनीतिक संबंधों का उपयोग तनाव कम करने के लिए कर रहा है।
* दो-राज्य समाधान: उन्होंने दोहराया कि भारत फिलिस्तीन मुद्दे पर ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ के अपने पुराने रुख पर कायम है, लेकिन आतंकवाद और संप्रभुता के उल्लंघन का भी विरोध करता है।
भारतीयों के लिए सुरक्षा चक्र: ‘इमरजेंसी रिस्पॉन्स’
विदेश मंत्री ने उन कदमों का ब्यौरा दिया जो सरकार उठा रही है:
* कंट्रोल रूम: दिल्ली और संबंधित देशों की राजधानियों में विशेष डेस्क बनाए गए हैं।
* लॉजिस्टिक्स: नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ तालमेल बिठाकर चार्टर्ड उड़ानों का खाका तैयार है।
* पड़ोसी देशों से संपर्क: ईरान और इजरायल के पड़ोसी देशों (जैसे जॉर्डन और यूएई) के साथ ट्रांजिट रूट पर बातचीत हो चुकी है। “भारत की प्राथमिकता अपने लोगों की जान बचाना है। हमारे पास हर नागरिक का डेटाबेस तैयार है और हम पल-पल की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।” — एस. जयशंकर