Lok Sabha Politics /नई दिल्ली: भारतीय संसदीय इतिहास में सोमवार 9 मार्च 2026 का दिन एक बड़े टकराव के गवाह के रूप में दर्ज हो गया है। बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत होते ही विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया। इस कदम के साथ ही तकनीकी रूप से स्पीकर को सदन की कार्यवाही के संचालन से ‘खामोश’ होना पड़ा है।
विवाद की जड़: राहुल गांधी का भाषण और ‘सेंसरशिप’ के आरोप
इस पूरे विवाद की शुरुआत बजट सत्र के पहले चरण में हुई थी। विपक्ष का आरोप है कि नेता प्रतिपक्ष (LoP) राहुल गांधी को सदन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने से लगातार रोका गया।
* भाषण पर रोक: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान बोलना शुरू किया, तो उन्हें बार-बार टोका गया और अंततः उनका भाषण पूरा नहीं होने दिया गया।
* इतिहास में पहली बार: राहुल गांधी ने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए कहा, “हिंदुस्तान के इतिहास में पहली बार नेता प्रतिपक्ष को बोलने का अधिकार छीना गया है। यह लोकतंत्र की हत्या है।”
विपक्ष का मास्टरस्ट्रोक: अनुच्छेद 94(C) का इस्तेमाल
विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के करीब 120 सांसदों ने हस्ताक्षर कर स्पीकर को हटाने का नोटिस दिया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, के. सुरेश और मोहम्मद जावेद ने इस प्रस्ताव की अगुवाई की।
नियमों का खेल: संविधान के अनुच्छेद 94(C) के तहत, जब स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सदन के विचाराधीन होता है तो वह सदन की अध्यक्षता नहीं कर सकते।
एक महीने की ‘खामोशी’: बजट सत्र का यह दूसरा हिस्सा 2 अप्रैल 2026 तक चलना है। इस प्रस्ताव के आने के बाद अब ओम बिरला कार्यवाही का संचालन नहीं कर पाएंगे, जब तक कि इस पर मतदान न हो जाए। विपक्ष इसे अपनी नैतिक जीत मान रहा है।
स्पीकर पर विपक्ष के गंभीर आरोप
अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में विपक्ष ने केवल राहुल गांधी के मुद्दे को ही नहीं, बल्कि कई अन्य शिकायतों को भी शामिल किया है:
पक्षपात का आरोप: विपक्ष का दावा है कि स्पीकर सत्तापक्ष के प्रति झुकाव रखते हैं और विपक्षी सांसदों के मुद्दों को अनसुना करते हैं।
सांसदों का निलंबन: पिछले सत्र में आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को भी इस प्रस्ताव का आधार बनाया गया है।
महिला सांसदों का अपमान: कुछ महिला सांसदों ने आरोप लगाया है कि सदन के भीतर उनके प्रति अनुचित टिप्पणियां की गईं, जिस पर स्पीकर ने कोई कार्रवाई नहीं की।
क्या कहती है सरकार और क्या है आगे की राह?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के इस कदम को “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया है। सरकार का तर्क है कि उनके पास सदन में पूर्ण बहुमत है, इसलिए यह प्रस्ताव गिरना तय है।
प्रक्रिया: प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन आवश्यक है, जो विपक्ष के पास मौजूद है। अब इस पर विस्तृत चर्चा और फिर मतदान होगा।
ममता की एंट्री: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन करने का फैसला किया है, जिससे विपक्षी एकता और मजबूत दिखाई दे रही है।