Middle East crisis /नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की आहट के बीच भारत सरकार ने वहां रहने वाले लाखों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। राज्यसभा में संबोधन के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार न केवल स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है, बल्कि किसी भी आपात स्थिति के लिए एक ‘सेफ एग्जिट प्लान’ भी तैयार कर लिया है।
बातचीत ही एकमात्र समाधान: जयशंकर
सदन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारा मानना है कि हिंसा किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। भारत हमेशा से ही मुद्दों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का पक्षधर रहा है।” उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से शांति बहाली के लिए एकजुट होने की अपील की।
क्या है भारत का ‘सेफ प्लान’?
जब सदन में सांसदों ने भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछे, तो जयशंकर ने सरकार की रणनीति के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सरकार ने ‘मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट रूट’ की पहचान की है, ताकि जरूरत पड़ने पर भारतीयों को तेजी से निकाला जा सके।
1. सुरक्षित हवाई गलियारा (Air Corridor)
सरकार ने एयर इंडिया और अन्य निजी विमानन कंपनियों के साथ-साथ भारतीय वायुसेना को भी अलर्ट मोड पर रखा है। यदि हवाई क्षेत्र (Airspace) सुरक्षित रहता है, तो विशेष विमानों के जरिए ‘ऑपरेशन गंगा’ या ‘ऑपरेशन अजय’ की तर्ज पर नागरिकों को सीधे भारत लाया जाएगा।
2. समुद्री मार्ग का उपयोग (Sea Routes)
यदि युद्ध के कारण हवाई मार्ग बाधित होते हैं, तो भारतीय नौसेना के जहाजों को तैनात किया जाएगा। ओमान, यूएई और कतर जैसे मित्र देशों के बंदरगाहों का उपयोग ‘ट्रांजिट पॉइंट्स’ के रूप में करने की योजना है। यहाँ से भारतीयों को सुरक्षित समुद्री रास्ते से भारत के पश्चिमी तट (जैसे मुंबई या कोच्चि) तक लाया जा सकता है।
3. पड़ोसी देशों के जरिए निकासी (Land & Transit)
जयशंकर ने बताया कि खाड़ी देशों के भीतर सड़क मार्ग का उपयोग करके नागरिकों को सुरक्षित क्षेत्रों या उन देशों में ले जाया जाएगा जहाँ से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित हो रही हैं। इसके लिए संबंधित देशों की सरकारों से निरंतर संपर्क साधा जा रहा है।
दूतावासों में 24/7 हेल्पलाइन
विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि इजरायल, लेबनान, ईरान और जॉर्डन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में स्थित भारतीय दूतावासों में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। नागरिकों को पंजीकरण करने और दूतावास के संपर्क में रहने की सलाह दी गई है। “हमारी प्राथमिकता अपने नागरिकों का जीवन बचाना है। हमारे पास हर संभावित परिदृश्य (Scenario) के लिए प्लान ‘A’, ‘B’ और ‘C’ तैयार हैं।” — एस. जयशंकर, विदेश मंत्री
आर्थिक प्रभाव पर भी नजर
युद्ध की स्थिति में केवल सुरक्षा ही नहीं बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी सरकार की नजर है। मिडिल ईस्ट में तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आने की आशंका है, जो भारत जैसे बड़े आयातक के लिए चुनौती बन सकता है।