Gas Cylinders/बेंगलुरु:- कर्नाटक के प्रमुख शहरों, विशेष रूप से सिलिकॉन वैली बेंगलुरु और शिवमोगा में होटल उद्योग एक अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा है। कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की भारी किल्लत और आपूर्ति में आई बाधा के कारण होटल मालिकों ने अपने मेन्यू (Menu) को छोटा करने का कड़ा फैसला लिया है। अब ग्राहकों को उनके पसंदीदा व्यंजन, विशेष रूप से वे जिनमें अधिक समय और गैस की खपत होती है, प्लेट में नहीं मिल रहे हैं।
क्या है संकट की मुख्य वजह?
पिछले कुछ हफ्तों से कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बुरी तरह प्रभावित हुई है। बेंगलुरु और शिवमोगा के होटल संघों का कहना है कि वितरकों के पास स्टॉक की कमी है जिसके कारण सिलेंडरों की डिलीवरी में 3 से 5 दिनों की देरी हो रही है। होटल मालिकों के अनुसार, जहाँ पहले ऑर्डर देने के 24 घंटे के भीतर सिलेंडर मिल जाते थे, वहीं अब घंटों इंतजार के बाद भी अनिश्चितता बनी रहती है। इस आपूर्ति संकट ने रसोई के पहियों को धीमा कर दिया है।
मेन्यू में ‘कटौती’ का गणित
गैस बचाने के लिए होटल संचालकों ने उन व्यंजनों को मेन्यू से हटाना शुरू कर दिया है जिन्हें बनाने में गैस की अधिक खपत होती है या जिन्हें धीमी आंच पर लंबे समय तक पकाना पड़ता है।
* तंदूरी व्यंजन: तंदूरी चिकन, रोटी और नान जैसे आइटम कई जगहों पर बंद कर दिए गए हैं क्योंकि तंदूर को गर्म रखने के लिए लगातार गैस की आवश्यकता होती है।
* डीप फ्राई आइटम: समोसे, कचौड़ी और कुछ विशेष स्नैक्स की उपलब्धता सीमित कर दी गई है।
* ग्रेवी वाले विशेष व्यंजन: लंबी अवधि तक उबाले जाने वाले शोरबे और दाल मखनी जैसे व्यंजनों को भी कुछ समय के लिए ‘आउट ऑफ स्टॉक’ कर दिया गया है।
होटल मालिकों की पीड़ा
बेंगलुरु होटल एसोसिएशन के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया, “हम ग्राहकों को खोना नहीं चाहते, लेकिन बिना गैस के चूल्हा कैसे जलेगा? हमारे पास जो स्टॉक बचा है, हम उसका उपयोग केवल बुनियादी दक्षिण भारतीय भोजन (जैसे इडली-डोसा) के लिए कर रहे हैं ताकि कम से कम नाश्ते और दोपहर के भोजन की आपूर्ति बनी रहे।” शिवमोगा में भी स्थिति अलग नहीं है। वहां के छोटे और मध्यम स्तर के होटलों ने कोयले और बिजली के इंडक्शन का रुख करना शुरू कर दिया है, लेकिन भारी मांग के सामने ये विकल्प नाकाफी साबित हो रहे हैं।
लाग और मुनाफे पर असर
कमर्शियल सिलेंडरों की कमी ने कालाबाजारी की संभावना को भी जन्म दे दिया है। कुछ क्षेत्रों में होटल मालिकों को मजबूरी में ऊंचे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी परिचालन लागत (Operating Cost) 20% से 30% तक बढ़ गई है। इसके बावजूद, अधिकांश होटलों ने अभी तक कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है, बल्कि मेन्यू छोटा करने को ही प्राथमिकता दी है।
सरकार से मदद की गुहार
होटल और रेस्टोरेंट संघों ने राज्य सरकार और पेट्रोलियम कंपनियों से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अगले एक सप्ताह के भीतर आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो कई छोटे होटलों को अपनी शटर गिराने पड़ सकते हैं, जिससे हजारों कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर संकट आ जाएगा।