Iran war /नई दिल्ली:-पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूचाल ला दिया है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतें मार्च 2026 में $114 प्रति बैरल के उच्च स्तर को छू चुकी हैं। इस संकट का सबसे भयावह असर भारत के पड़ोसी देशों पर पड़ा है।
पड़ोसियों का हाल: पाकिस्तान और बांग्लादेश में ‘फ्यूल राशनिंग’
* पाकिस्तान: पाकिस्तान में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। सरकार ने ईंधन की कीमतों में 55 रुपये प्रति लीटर की रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है। तेल की बचत के लिए पाकिस्तान ने “वर्क फ्रॉम होम” और स्कूलों में छुट्टियों जैसे कड़े कदम उठाए हैं। यहाँ तक कि सरकारी दफ्तरों को भी सप्ताह में केवल 4 दिन खोलने का निर्णय लिया गया है।
* बांग्लादेश: बांग्लादेश में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हैं। सरकार ने ‘फ्यूल राशनिंग’ लागू कर दी है, जिसके तहत मोटरसाइकिलों को एक बार में केवल 2 लीटर पेट्रोल दिया जा रहा है। गैस की कमी से वहाँ के उद्योग ठप होने की कगार पर हैं।
भारत में क्या है स्थिति?
भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वह इस संकट के प्रति बेहद संवेदनशील है। हालांकि, भारतीय बाजार में अभी तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन रसोई गैस (LPG) के मोर्चे पर बुरी खबर आई है। 7 मार्च 2026 से घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिससे दिल्ली में इसकी कीमत 913 रुपये तक पहुँच गई है।
सरकार की बड़ी तैयारी: ‘इमरजेंसी ऑयल प्लान’
भारत सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए बहुस्तरीय रणनीति तैयार की है:
* रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves): भारत के पास वर्तमान में लगभग 250 मिलियन बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का भंडार है। यह स्टॉक देश की जरूरतों को 7 से 8 हफ्ते तक पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
* एलपीजी उत्पादन पर जोर: सरकार ने ‘इमरजेंसी पावर’ का इस्तेमाल करते हुए रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे प्रोपेन और ब्यूटेन का पूरा उपयोग घरेलू कुकिंग गैस (LPG) बनाने में करें ताकि रसोई में संकट न आए।
* विकल्पों की तलाश: भारत अब खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने के लिए रूस से अधिक कच्चा तेल खरीदने और अमेरिका व अफ्रीका जैसे वैकल्पिक बाजारों से आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए बातचीत कर रहा है।
* बीमा सुरक्षा: मिडिल ईस्ट से आने वाले तेल जहाजों की सुरक्षा के लिए भारत ने अमेरिका से समुद्री बीमा संरक्षण (Maritime Insurance) दिलाने के लिए भी संपर्क साधा है।
क्या आगे बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आश्वासन दिया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक $110 के ऊपर बनी रहीं, तो तेल कंपनियों का घाटा बढ़ेगा और सरकार को अंततः कीमतों में कुछ वृद्धि या टैक्स कटौती जैसा कदम उठाना पड़ सकता है। फिलहाल, सरकार का पूरा जोर सप्लाई चेन को बनाए रखने पर है ताकि आम जनता को ईंधन की किल्लत का सामना न करना पड़े।