नई दिल्ली :- देश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बार कुल सैंतीस सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है जिसमें कई सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं जबकि कुछ राज्यों में मुकाबला काफी दिलचस्प बन गया है। राजनीतिक दलों की रणनीति और समीकरणों पर सभी की नजर टिकी हुई है।
जानकारी के अनुसार दस राज्यों की सैंतीस सीटों पर सोलह मार्च को मतदान होना है। इनमें से सात राज्यों की छब्बीस सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन लगभग तय माना जा रहा है। इन सीटों पर नामांकन के बाद किसी अन्य उम्मीदवार के मैदान में न आने से मुकाबला समाप्त हो गया है और संबंधित दलों को बिना मतदान के ही सफलता मिलने वाली है।
हालांकि कुछ राज्यों में स्थिति पूरी तरह अलग है जहां राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। खास तौर पर बिहार हरियाणा और ओडिशा में राज्यसभा की ग्यारह सीटों पर चुनावी टक्कर दिलचस्प मानी जा रही है। इन राज्यों में अलग अलग दलों के उम्मीदवार मैदान में हैं और संख्या बल के साथ साथ क्रॉस वोटिंग की संभावना को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यसभा चुनाव केवल संख्या का खेल नहीं होता बल्कि इसमें दलों के बीच रणनीतिक समझ और गठबंधन भी अहम भूमिका निभाते हैं। कई बार छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी परिणाम को प्रभावित कर सकता है।
अब सभी की नजर सोलह मार्च को होने वाले मतदान पर टिकी हुई है। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि उच्च सदन में किस दल की स्थिति मजबूत होगी और आने वाले समय में संसद के भीतर राजनीतिक संतुलन किस दिशा में जाएगा।