Prank video /दिल्ली:- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की कक्षा 12वीं की गणित की परीक्षा जो सामान्यतः अपने कठिन समीकरणों और जटिल कैलकुलस के लिए जानी जाती है इस बार एक बेहद ही अजीबोगरीब और मजाकिया कारण से चर्चा में है। बोर्ड परीक्षा के इतिहास में संभवतः यह पहली बार हुआ है जब एक प्रश्नपत्र के साथ किसी ने ‘डिजिटल प्रैंक’ (मजाक) कर दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबरों के अनुसार गणित के प्रश्नपत्र पर दिए गए एक क्यूआर (QR) कोड को स्कैन करने पर छात्र किसी शैक्षणिक वेबसाइट या समाधान के बजाय प्रसिद्ध ‘रिकरोल’ (Rickroll) मीम वीडियो पर पहुँच गए।
क्या है पूरा मामला?
मामला तब शुरू हुआ जब परीक्षा हॉल से बाहर निकलने के बाद कुछ जिज्ञासु छात्रों ने प्रश्नपत्र के निचले हिस्से में छपे एक क्यूआर कोड को स्कैन किया। छात्रों को उम्मीद थी कि यह कोड बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट, उत्तर कुंजी (Answer Key) या शायद किसी डिजिटल संसाधन की ओर ले जाएगा। लेकिन जैसे ही उन्होंने कोड स्कैन किया, उनके फोन की स्क्रीन पर 1980 के दशक के मशहूर गायक रिक एस्टली (Rick Astley) का गाना “Never Gonna Give You Up” बजने लगा। इंटरनेट की भाषा में इसे ‘रिकरोलिंग’ (Rickrolling) कहा जाता है—यह एक ग्लोबल प्रैंक है जहाँ किसी महत्वपूर्ण लिंक के नाम पर लोगों को इस गाने के वीडियो पर भेज दिया जाता है।
सोशल मीडिया पर आई मीम्स की बाढ़
जैसे ही यह खबर फैली, ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर छात्रों ने मीम्स की बौछार कर दी। एक छात्र ने पोस्ट किया, “बोर्ड को लगा कि हमें डिफरेंशियल इक्वेशन से कम तनाव मिल रहा है, इसलिए उन्होंने हमें रिकरोल करने का फैसला किया।” वहीं एक अन्य छात्र ने लिखा, “जब मैंने कोड स्कैन किया, तो मुझे लगा कि शायद ग्रेस मार्क्स मिलेंगे, लेकिन रिक एस्टली ने कहा—नेवर गना गिव यू अप!”
तकनीकी चूक या जानबूझकर किया गया मजाक?
विशेषज्ञों और तकनीकी जानकारों का मानना है कि इसके पीछे दो मुख्य कारण हो सकते हैं। पहला यह कि बोर्ड ने जिस डोमेन या यूआरएल (URL) का उपयोग कोड बनाने के लिए किया था वह या तो एक्सपायर हो गया था या उसे किसी प्रैंकस्टर ने हैक करके रीडायरेक्ट कर दिया। दूसरा कारण यह हो सकता है कि प्रश्नपत्र सेट करने वाली टीम के किसी सदस्य ने शरारत के तौर पर इसे शामिल किया हो। हालांकि सीबीएसई ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है लेकिन सूत्रों का कहना है कि बोर्ड इस बात की जांच कर रहा है कि यह कोड प्रश्नपत्र का हिस्सा कैसे बना।
अभिभावकों और शिक्षकों की चिंता
जहाँ छात्र इसे एक मजेदार घटना के रूप में देख रहे हैं, वहीं अभिभावक और शिक्षाविद बोर्ड की सुरक्षा और गंभीरता पर सवाल उठा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एक क्यूआर कोड किसी बाहरी वीडियो पर ले जा सकता है, तो भविष्य में इसके जरिए किसी हानिकारक साइट या गलत जानकारी का प्रसार भी हो सकता है। यह बोर्ड परीक्षाओं की गोपनीयता और तकनीकी ऑडिटिंग की प्रक्रिया पर एक बड़ा सवालिया निशान है।