SIR Hearing /नई दिल्ली:- पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर जारी कानूनी और प्रशासनिक गहमागहमी के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर जानकारी दी है कि न्यायिक अधिकारियों ने अब तक 10.16 लाख से अधिक दावों और आपत्तियों का सफलतापूर्वक निपटारा कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस प्रगति पर संतोष जताया और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए तैनात न्यायिक अधिकारियों की निष्ठा की सराहना की।
न्यायिक अधिकारियों का ‘मैराथन’ प्रयास
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार (10 मार्च 2026) को हुई सुनवाई के दौरान यह जानकारी साझा की गई कि पश्चिम बंगाल के लगभग 500 न्यायिक अधिकारी दिन-रात काम कर रहे हैं। ये अधिकारी ‘निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी’ (ERO) और ‘सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी’ (AERO) के रूप में तैनात हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कार्यभार इतना अधिक है कि इन अधिकारियों ने अपनी छुट्टियां और रविवार तक रद्द कर दिए हैं ताकि 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के पूरक (Supplementary) हिस्से को समय पर पूरा किया जा सके। पश्चिम बंगाल में बढ़ते बोझ को देखते हुए पड़ोसी राज्यों—ओडिशा और झारखंड—से भी 200 न्यायिक अधिकारियों को मदद के लिए बुलाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: “न्यायपालिका की अखंडता पर सवाल बर्दाश्त नहीं”
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने उन याचिकाओं पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की, जिनमें न्यायिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर संदेह जताया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
> “यह आवेदन समय से पहले है और ऐसा प्रतीत होता है कि आपको न्यायिक अधिकारियों पर भरोसा नहीं है। भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में, मैं न्यायिक अधिकारियों की अखंडता पर किसी भी तरह के सवाल उठाने को बर्दाश्त नहीं करूँगा।”कोर्ट ने कहा कि जब न्यायिक अधिकारी इस पूरी प्रक्रिया की कमान संभाल रहे हैं, तो पक्षपात या त्रुटि की गुंजाइश न के बराबर है।
अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) का होगा गठन
जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं या जिनके दावों को न्यायिक अधिकारियों ने खारिज कर दिया है, उनके लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक सुरक्षा चक्र तैयार किया है। कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि वे सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के नेतृत्व में ‘अपीलीय न्यायाधिकरण’ का गठन करें। ये न्यायाधिकरण उन लोगों की शिकायतों को सुनेंगे जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इस पूरी प्रक्रिया का खर्च भारतीय चुनाव आयोग (ECI) उठाएगा।
पूरा विवाद क्या है?
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 से पहले मतदाता सूची में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ (तार्किक विसंगतियों) और ‘अनमैप्ड’ श्रेणियों के तहत लगभग 1.40 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे। चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच ‘भरोसे की कमी’ (Trust Deficit) को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए इस प्रक्रिया में न्यायपालिका को शामिल किया था। 28 फरवरी को प्रकाशित सूची में भारी संख्या में नाम हटाए गए थे, जिससे राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया था। अब 10 लाख से अधिक आपत्तियों का निपटारा होने से सूची में और अधिक स्पष्टता आने की उम्मीद है।
आगे क्या होगा?
अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह न्यायिक अधिकारियों को हर संभव लॉजिस्टिक सहायता (वाहन, स्टाफ आदि) प्रदान करे। जो पूरक सूची तैयार होगी, उसे 28 फरवरी की अंतिम सूची का ही हिस्सा माना जाएगा।