वाशिंगटन (अमेरिका):- पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियान को लेकर नई जानकारी सामने आई है। अमेरिकी सेना की कमान संभालने वाली संस्था सेंटकॉम ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के पहले दस दिनों की रिपोर्ट जारी की है जिसमें बताया गया है कि शुरुआती चरण में किस तरह बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए गए।
रिपोर्ट के अनुसार अभियान की शुरुआत में अमेरिका ने अपने सबसे ताकतवर बमवर्षक और हमलावर विमानों का इस्तेमाल किया। इनमें Rockwell B‑1B Lancer जैसे लंबी दूरी के बमवर्षक विमान शामिल थे। यह विमान भारी मात्रा में बम लेकर दूर तक उड़ान भरने और सटीक हमले करने की क्षमता रखते हैं। इनके जरिए रणनीतिक ठिकानों और सैन्य ढांचों को निशाना बनाया गया।
इसके अलावा जमीनी लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए Fairchild Republic A‑10 Thunderbolt II का भी उपयोग किया गया। इस विमान को खास तौर पर टैंक और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। युद्ध क्षेत्र में इसकी मजबूत संरचना और सटीक हमला करने की क्षमता इसे बेहद प्रभावी बनाती है।
सेंटकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक पहले दस दिनों में कई सैन्य ठिकानों संचार केंद्रों और हथियार भंडारण स्थलों को निशाना बनाया गया। इस अभियान का उद्देश्य विरोधी सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और रणनीतिक दबाव बनाना बताया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध में हवाई शक्ति की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। लंबी दूरी के बमवर्षक विमान ड्रोन और उन्नत मिसाइल प्रणाली मिलकर दुश्मन के ठिकानों पर तेज और सटीक हमला करने में सक्षम हैं। इसी वजह से शुरुआती चरण में ही बड़े पैमाने पर हवाई अभियान चलाए जाते हैं।
हालांकि इस तरह के हमलों से क्षेत्रीय तनाव भी बढ़ जाता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता भी बढ़ती है। कई देशों और संगठनों ने संघर्ष को बढ़ने से रोकने के लिए कूटनीतिक समाधान की अपील की है।
पश्चिम एशिया की यह स्थिति वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकती है। इसलिए दुनिया भर की नजरें इस संघर्ष के अगले कदम पर टिकी हुई हैं और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही शांति और बातचीत का रास्ता निकले।