Zero tolerance : एटा के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) रिश्वतखोरी के आरोप में निलंबित, केशव प्रसाद मौर्य ने दी कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

Zero tolerance/लखनऊ:-उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को लेकर एक बार फिर सख्त नजर आ रही है। ताज़ा मामला एटा जिले का है जहाँ के मुख्य विकास अधिकारी (CDO) नागेंद्र नारायण मिश्रा को रिश्वत मांगने के गंभीर आरोपों के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस घटना ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।

क्या है पूरा मामला?

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा था। इस वीडियो में कथित तौर पर एटा के मुख्य विकास अधिकारी नागेंद्र नारायण मिश्रा को किसी कार्य के बदले रिश्वत की मांग करते हुए देखा और सुना जा सकता था। जैसे ही यह वीडियो सार्वजनिक हुआ शासन स्तर पर इसे गंभीरता से लिया गया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस मामले की पुष्टि करते हुए अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के ऐसे मामलों में कोई भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

नियम 7 के तहत विभागीय जांच शुरू

उपमुख्यमंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, नागेंद्र नारायण मिश्रा के विरुद्ध नियम 7 के अंतर्गत विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है और एक उच्च स्तरीय समिति इस पूरे प्रकरण की जांच करेगी।

“श्री नागेंद्र नारायण मिश्रा, मुख्य विकास अधिकारी, एटा द्वारा कथित रूप से रिश्वत मांगने से संबंधित वीडियो वायरल होने के प्रकरण में उनके विरुद्ध नियम 7 के अंतर्गत विभागीय कार्यवाही प्रारंभ की गई है तथा उन्हें निलंबित कर दिया गया है।” केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदे

भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार

यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश शासन के उस संकल्प को दोहराती है, जिसमें बार-बार कहा गया है कि जनता के कार्यों में बाधा डालने वाले या अनुचित लाभ उठाने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। विकास कार्यों की देखरेख करने वाले इतने वरिष्ठ पद पर तैनात अधिकारी का नाम रिश्वतखोरी में आना जिले के विकास तंत्र पर भी सवालिया निशान लगाता है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, उक्त अधिकारी के खिलाफ पहले भी कुछ मौखिक शिकायतें प्राप्त हुई थीं, लेकिन वीडियो साक्ष्य सामने आने के बाद सरकार ने त्वरित एक्शन लिया है।

प्रशासनिक हलचल और आगामी कदम

नागेंद्र नारायण मिश्रा के निलंबन के बाद अब एटा में नए मुख्य विकास अधिकारी की नियुक्ति या प्रभार को लेकर चर्चाएं तेज हैं। जांच टीम अब वायरल वीडियो की सत्यता की फोरेंसिक जांच करेगी और संबंधित पक्षकारों के बयान दर्ज करेगी। यदि जांच में आरोप पूरी तरह सिद्ध हो जाते हैं, तो सेवा समाप्ति जैसी कठोर कार्रवाई भी अमल में लाई जा सकती है। इस घटना ने अन्य सरकारी अधिकारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश भेजा है कि सोशल मीडिया के इस दौर में भ्रष्टाचार को छुपाना नामुमकिन है और सरकार की पैनी नजर हर गतिविधि पर बनी हुई है।

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