Air ticket prices : आसमान छूने लगे हवाई ईंधन के दाम, $200 प्रति बैरल तक पहुंची कीमतें; हवाई सफर होगा और भी महंगा

Air ticket prices /नई दिल्ली:- पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान के हालिया हमलों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़नी शुरू कर दी है। इसका सबसे सीधा और मारक असर विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) पर देखने को मिल रहा है। ‘एयर न्यूजीलैंड’ (Air New Zealand) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों और वैश्विक रिपोर्ट्स के अनुसार, विमान ईंधन यानी जेट फ्यूल (ATF) की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया है, जिससे आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू हवाई टिकटों के दामों में भारी बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है।

कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ उछाल: $90 से सीधे $200 तक का सफर

ईरान के हमलों से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और जेट फ्यूल की स्थिति काफी हद तक स्थिर बनी हुई थी। कुछ समय पहले तक जेट फ्यूल की कीमतें $85 से $90 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई थीं। लेकिन युद्ध की आहट और तेल आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में आए व्यवधान के कारण अब ये कीमतें $150 से $200 प्रति बैरल के स्तर को छू रही हैं। कीमतों में यह लगभग दो गुना से अधिक का इजाफा एयरलाइंस कंपनियों के बजट को पूरी तरह बिगाड़ चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च (Operational Cost) का लगभग 40% से 50% हिस्सा अकेले ईंधन पर खर्च होता है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में $100 से ज्यादा की बढ़ोतरी सीधे तौर पर कंपनी के मुनाफे को खत्म कर देती है।

हवाई यात्रियों पर बढ़ेगा बोझ: टिकट की कीमतों में आएगी तेजी

एयर न्यूजीलैंड ने चेतावनी दी है कि ईंधन की कीमतों में इस अभूतपूर्व वृद्धि के कारण दुनिया भर की एयरलाइंस को अपनी लागत वसूलने के लिए टिकट दरों में वृद्धि करनी होगी। मिडिल ईस्ट के हवाई क्षेत्र (Airspace) में तनाव के कारण कई उड़ानों के रूट बदले गए हैं, जिससे यात्रा का समय और ईंधन की खपत दोनों बढ़ गई हैं।

इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा:

* महंगा होगा विदेश सफर: भारत से यूरोप या अमेरिका जाने वाली उड़ानों के रूट में बदलाव और तेल की कीमतों के कारण किराया 20% से 30% तक बढ़ सकता है।

* घरेलू उड़ानों पर भी साया: हालांकि भारत में कीमतें वैश्विक बेंचमार्क पर आधारित होती हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू हवाई सफर को भी महंगा कर देंगी।

* मिडिल ईस्ट का संकट: दुबई, कतर और सऊदी अरब जैसे ट्रांजिट हब से गुजरने वाली उड़ानों के लिए यह समय सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण है।

बाजार की चिंता और एयरलाइंस की रणनीति

ईंधन की कीमतों में $200 प्रति बैरल का स्तर एक ‘खतरे की घंटी’ की तरह है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग प्रभावित होते हैं, तो तेल की कीमतें और भी अनियंत्रित हो सकती हैं। एयरलाइंस अब ‘फ्यूल सरचार्ज’ (Fuel Surcharge) लगाने पर विचार कर रही हैं। एयर न्यूजीलैंड के बयान के बाद अन्य वैश्विक एयरलाइंस जैसे लुफ्थांसा, कतर एयरवेज और अमीरात भी अपने किराए की समीक्षा कर रहे हैं। भारतीय एयरलाइंस (इंडिगो, एयर इंडिया) भी वैश्विक बाजार की स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि ATF की कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव का असर उनके त्रैमासिक परिणामों (Quarterly Results) पर पड़ेगा।

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