Football match /कैनबरा:- ऑस्ट्रेलिया ने ईरानी महिला फुटबॉल टीम की पांच खिलाड़ियों को आधिकारिक रूप से राजनीतिक शरण (Asylum) दे दी है। यह फैसला उन खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में आया है जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था और जिन्हें वतन लौटने पर सुरक्षा संबंधी गंभीर खतरों का डर था। हालांकि, टीम की कुछ अन्य खिलाड़ियों ने तमाम जोखिमों के बावजूद ईरान लौटने का फैसला किया है।
विरोध की वह घटना जिसने बदल दी जिंदगी
यह पूरा मामला एक मैच के दौरान शुरू हुआ जब ईरानी महिला टीम की इन खिलाड़ियों ने ईरान में हो रहे मानवाधिकारों के उल्लंघन और महिलाओं पर कड़े प्रतिबंधों के विरोध में राष्ट्रगान गाने से मना कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय कैमरों के सामने की गई इस बगावत ने ईरान की सरकार को नाराज कर दिया था। इसके बाद से ही इन खिलाड़ियों को लगातार धमकियां मिल रही थीं और उन पर देशद्रोही होने के आरोप लगाए जा रहे थे।
ऑस्ट्रेलिया का मानवीय दृष्टिकोण
ऑस्ट्रेलियाई आव्रजन विभाग ने इन पांच फुटबॉलरों के दावों की गहन जांच के बाद उन्हें शरण देने का फैसला किया।
* सुरक्षा का मुद्दा: सरकार ने माना कि यदि ये खिलाड़ी ईरान लौटती हैं, तो उन्हें गिरफ्तारी, उत्पीड़न या उससे भी बुरा व्यवहार सहना पड़ सकता है।
* अधिकारों का सम्मान: ऑस्ट्रेलिया ने इस कदम के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के पक्ष में खड़ा है।
* नया जीवन: अब ये पांच खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षित रह सकेंगी और संभवतः यहाँ के स्थानीय फुटबॉल क्लबों के साथ अपने खेल करियर को दोबारा शुरू कर सकेंगी।
बाकी खिलाड़ियों का क्या?
रिपोर्ट के अनुसार, टीम की अन्य खिलाड़ियों ने वापस ईरान लौटने का विकल्प चुना है। उनके इस फैसले के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं:
* परिवार की सुरक्षा: कई खिलाड़ियों को डर है कि यदि वे बाहर शरण लेती हैं, तो ईरान में मौजूद उनके परिवार को सरकारी प्रताड़ना का सामना करना पड़ सकता है।
* अनिश्चित भविष्य: विदेश में शरणार्थी बनकर रहना और अपनी पहचान खो देना हर किसी के लिए आसान नहीं होता।
* मजबूरी की वापसी: सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वतन लौटने वाली खिलाड़ियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और उन्हें भविष्य में देश का प्रतिनिधित्व करने से भी रोका जा सकता है।
ईरान में बढ़ता असंतोष और खिलाड़ी
पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि ईरानी एथलीट अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का इस्तेमाल विरोध के मंच के रूप में कर रहे हैं। हिजाब विवाद और ‘महिला-जीवन-स्वतंत्रता’ (Woman-Life-Freedom) आंदोलन के बाद से खेल जगत के सितारों ने कई बार साहस दिखाया है। इससे पहले भी कई ईरानी पहलवान और शतरंज खिलाड़ी यूरोप और अमेरिका में शरण ले चुके हैं।