नई दिल्ली :- ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। इसी स्थिति को देखते हुए भारत ने प्राकृतिक गैस आपूर्ति में संभावित संकट से निपटने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है और दोहरी सुरक्षा रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार पश्चिम एशिया में किसी भी बड़े टकराव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। खासतौर पर समुद्री मार्गों और ऊर्जा परिवहन पर जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है, जिससे गैस और तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
दोहरी सुरक्षा रणनीति पर जोर
भारत की रणनीति का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है। इसके तहत
अलग-अलग देशों से गैस आयात के स्रोतों में विविधता बढ़ाना
रणनीतिक भंडारण और आपूर्ति प्रबंधन को मजबूत करना
जैसे कदम शामिल किए गए हैं।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में समय रहते रणनीति तैयार करना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर नजर
भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त उपाय करने की तैयारी भी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए लंबी अवधि की रणनीति और वैकल्पिक स्रोत बेहद जरूरी हो गए हैं।