Trump Fascist Comment /कैनबरा (ऑस्ट्रेलिया): ऑस्ट्रेलियाई संसद (Senate) एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मानवीय मूल्यों के टकराव का अखाड़ा बन गई है। हाल ही में एक ऑस्ट्रेलियाई सीनेटर ने अपनी ही सरकार की विदेश नीति और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रति उनके अटूट समर्थन पर जमकर लताड़ लगाई है। सीनेटर ने ट्रम्प को एक ‘फासीवादी वॉर क्रिमिनल’ (Fascist War Criminal) तक कह डाला और ऑस्ट्रेलिया के इस रुख पर सवाल उठाए कि वह एक ऐसे देश का साथ क्यों दे रहा है जो निर्दोष बच्चों पर हमले कर रहा है।
“क्या आपको शर्म नहीं आती?” – संसद में गूंजे तीखे सवाल
ऑस्ट्रेलियाई सीनेटर ने सदन के भीतर सीधे तौर पर सरकार से सवाल किया कि आखिर किस नैतिकता के आधार पर ट्रम्प प्रशासन का समर्थन किया जा रहा है। सीनेटर ने एक बेहद भावुक और कड़ा भाषण देते हुए कहा:
“क्या आपको शर्म नहीं आती एक ‘फासीवादी वॉर क्रिमिनल’ जैसे ट्रम्प और उस देश का समर्थन करने में, जो स्कूल की लड़कियों पर बम बरसा रहा है?”
यह तीखा हमला दरअसल ईरान में हाल ही में एक लड़कियों के स्कूल (Shajareh Tayyebeh School) पर हुई बमबारी के संदर्भ में था, जिसमें लगभग 175 लोगों की जान जाने की खबर है। सीनेटर का इशारा साफ था कि ऑस्ट्रेलिया को अपनी ‘अंधभक्त’ विदेश नीति छोड़कर उन मासूम जिंदगियों के बारे में सोचना चाहिए जो इस युद्ध की बलि चढ़ रही हैं।
विवाद की जड़: ईरान युद्ध और ट्रम्प की नीतियां
गौरतलब है कि मार्च 2026 की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य अड्डों पर हमलों का आदेश दिया था। हालांकि, इन हमलों के दौरान नागरिक ठिकानों, विशेषकर स्कूलों और अस्पतालों के प्रभावित होने की खबरों ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इस मुद्दे पर अमेरिका का पक्ष लिया है, जिसे लेकर वहां के कई सांसदों और सीनेटरों (जैसे लिडिया थोरपे और सारा हैनसन-यंग) ने कड़ी आपत्ति जताई है। सांसदों का मानना है कि यह युद्ध ‘अवैध’ है और ऑस्ट्रेलिया को इसमें शामिल होकर अपनी छवि खराब नहीं करनी चाहिए।
हिम्मत का ‘नेक्स्ट लेवल’ स्तर
ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी सांसद ने इस तरह का स्टैंड लिया हो, लेकिन ट्रम्प जैसे शक्तिशाली नेता को सीधे तौर पर ‘फासीवादी’ और ‘वॉर क्रिमिनल’ कहना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक बड़ा जोखिम माना जाता है। सोशल मीडिया पर इस भाषण के वीडियो क्लिप्स वायरल हो रहे हैं, और लोग इसे ‘हिम्मत का अगला स्तर’ बता रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के भाषणों से ऑस्ट्रेलिया की आंतरिक राजनीति में खलबली मच गई है। विपक्ष और स्वतंत्र सीनेटर्स अब सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वे अमेरिका के साथ अपने सैन्य गठबंधन की शर्तों पर पुनर्विचार करें और मानवीय संकट पर अपनी चुप्पी तोड़ें।