नई दिल्ली :- मौजूदा समय में कच्चा तेल 100 डॉलर के पार पहुंच गया है लेकिन $200 का स्तर एक ऐसी आर्थिक सुनामी ला सकता है जिसकी कल्पना मात्र से आम आदमी की नींद उड़ सकती है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, यह स्थिति किसी भी बड़े आर्थिक संकट से कम नहीं होगी। ऐसे में आइए जानते हैं कि कच्चे तेल की कीमतें अगर 200 डॉलर के पार गईं तो भारत में पेट्रोल कितने का मिलेगा?
कितनी हो जाएगी पेट्रोल की कीमत?
कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोल के दाम के बीच के गणित को समझें, तो आमतौर पर माना जाता है कि कच्चे तेल में हर $1 की बढ़त घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमत को 50 से 60 पैसे तक बढ़ा देती है। अगर आज कच्चा तेल $100 के आसपास है और पेट्रोल ₹100 के करीब मिल रहा है, तो $200 होने का मतलब है कि कच्चे तेल की बेस प्राइस में ही ₹50 से ₹60 का सीधा उछाल आ जाएगा। जब इस बढ़ी हुई कीमत पर केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी, राज्यों का वैट (VAT) और डीलर का कमीशन जुड़ेगा, तो पेट्रोल की कीमत आसानी से ₹170 से ₹200 प्रति लीटर के स्तर को छू सकती है।
सब चीजें होंगी महंगी
इस भारी उछाल का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा। भारत की पूरी अर्थव्यवस्था ‘ट्रांसपोर्टेशन’ पर टिकी है। डीजल की कीमतों में ऐसी ही बढ़त का मतलब है कि फल, सब्जियां, दूध और अनाज जैसी बुनियादी चीजों की ढुलाई का खर्च दोगुना हो जाएगा। इससे देश में हाइपर-इन्फ्लेशन (अत्यधिक महंगाई) की स्थिति पैदा हो सकती है। आम आदमी की बचत खत्म होने लगेगी और लोगों का बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा। हवाई सफर से लेकर ऑनलाइन सामान मंगाने तक, सब कुछ आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकता है।
सरकार के लिए भी यह एक धर्मसंकट की स्थिति होगी। अगर सरकार कीमतों को नियंत्रित करने के लिए टैक्स कम करती है, तो सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा, जिससे विकास कार्य और कल्याणकारी योजनाएं रुक सकती हैं। वहीं अगर सरकार टैक्स कम नहीं करती, तो जनता का गुस्सा सड़कों पर उतर सकता है। $200 बैरल कच्चे तेल का मतलब होगा कि भारत का ‘विदेशी मुद्रा भंडार’ (Foreign Exchange Reserve) तेजी से खत्म होने लगेगा, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर गिर सकता है।