नई दिल्ली :- देश में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक नई बहस सामने आई है। कई जगहों पर यह सवाल उठने लगा है कि अगर गैस आपूर्ति में किसी तरह की दिक्कत आती है तो क्या सरकार कुछ अस्थायी कदम उठा सकती है। इन्हीं चर्चाओं के बीच वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की व्यवस्था को लेकर भी संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि यदि ईंधन और गैस की खपत को कम करने की जरूरत पड़ी तो सरकार सरकारी और निजी कार्यालयों में सीमित अवधि के लिए घर से काम करने की सलाह दे सकती है।
हालांकि सरकार की ओर से अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक फैसला घोषित नहीं किया गया है लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि आपात परिस्थितियों में वर्क फ्रॉम होम एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है। इससे दफ्तरों में बिजली और ईंधन की खपत कम होती है और लोगों की आवाजाही भी घटती है जिससे परिवहन पर दबाव कम पड़ता है। कोविड महामारी के दौरान भी देश के कई संस्थानों और कंपनियों ने इसी व्यवस्था के जरिए कामकाज जारी रखा था।
इसी के साथ कुछ जगहों पर यह भी चर्चा है कि यदि स्थिति गंभीर हुई तो स्कूलों और कॉलेजों के संचालन पर भी अस्थायी असर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प अपनाया जा सकता है ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो। हालांकि शिक्षा विभाग और राज्य सरकारों की ओर से इस बारे में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पहले ही संसद में स्पष्ट कर चुके हैं कि देश में पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की आपूर्ति पर्याप्त है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार का कहना है कि भारत कई देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है और ऊर्जा आपूर्ति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
फिलहाल स्कूल बंद करने जैसी बातें केवल संभावनाओं और चर्चाओं तक सीमित हैं। किसी भी बड़े फैसले की स्थिति में सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा ही अंतिम मानी जाएगी। विशेषज्ञ भी लोगों से अपील कर रहे हैं कि अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।