नई दिल्ली :- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल और ईरान के बीच चल रहे टकराव पर दुनिया भर की नजर बनी हुई है। इसी बीच एक अमेरिकी विशेषज्ञ ने भारत को लेकर बड़ी चेतावनी दी है और कहा है कि अगर क्षेत्र में संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है। ऐसे में अगर इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष लंबा खिंचता है या समुद्री मार्गों पर खतरा बढ़ता है तो कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता जताई जा रही है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन रास्तों में से एक माना जाता है। अगर यहां किसी तरह का सैन्य तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो कई देशों के साथ भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी होने पर भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। इससे पेट्रोल डीजल और गैस की कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है। साथ ही महंगाई पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध स्रोतों से मजबूत करने की कोशिश की है। सरकार लगातार वैकल्पिक सप्लाई और रणनीतिक भंडार पर भी काम कर रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय संकट के समय देश की जरूरतें पूरी की जा सकें।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर मध्य पूर्व की स्थिति पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्षेत्र में तनाव कम होता है या हालात और जटिल हो जाते हैं।