कांशीराम को ‘भारत रत्न’ देने की उठी मांग, बैकवर्ड दलित माइनॉरिटी फोरम के अध्यक्ष सुनील वर्मा तथा महामंत्री श्याम किशोर समेत संगठन ने नेताओं को भेजा मांग पत्र

लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- राजधानी लखनऊ में एक सामाजिक संगठन की ओर से बहुजन आंदोलन के प्रमुख नेता कांशीराम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग उठाई गई है। संगठन ने इस संबंध में एक मांग पत्र जारी कर सरकार से अपील की है कि सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए उनके योगदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत यह सम्मान दिया जाए।

संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि कांशीराम भारतीय लोकतंत्र और सामाजिक परिवर्तन के बड़े नायकों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन दलितों, पिछड़ों और समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। उनके प्रयासों से देश के करोड़ों लोगों में आत्मसम्मान और राजनीतिक जागरूकता पैदा हुई।

मांग पत्र में यह भी कहा गया है कि कांशीराम ने अपने जीवनकाल में कई सामाजिक संगठनों के माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति तक राजनीतिक चेतना पहुंचाने का काम किया। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों को संगठित किया और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाया। उनके आंदोलनों का असर देश की राजनीति और सामाजिक व्यवस्था दोनों पर पड़ा।

संगठन का कहना है कि कांशीराम ने संविधान में निहित समानता और न्याय के मूल्यों को जमीन पर उतारने के लिए लगातार संघर्ष किया। उनके नेतृत्व में लाखों लोगों ने सामाजिक परिवर्तन के लिए आवाज उठाई और अपने अधिकारों के लिए संगठित हुए।

मांग पत्र में यह भी कहा गया है कि कांशीराम के ऐतिहासिक संघर्ष और सामाजिक योगदान को देखते हुए उन्हें ‘भारत रत्न’ दिया जाना देश की ओर से सच्ची श्रद्धांजलि होगी। संगठन के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस मांग पर गंभीरता से विचार करेगी और सामाजिक न्याय के इस महानायक को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित करेगी।

संगठन का मानना है कि यदि कांशीराम को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जाता है तो यह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं होगा, बल्कि उन करोड़ों लोगों की भावनाओं का भी सम्मान होगा जिनके लिए उन्होंने जीवन भर संघर्ष किया।

राहुल गांधी समेत कांग्रेस के अन्य नेताओं ने इस विषय की समीक्षा की और कहा कि यदि सत्ता हमारी होगी तो निश्चित ही उन्हें भारतरत्न प्रदान किया जाएगा।

 

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