नई दिल्ली :- मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। क्षेत्र में जारी टकराव के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है। खास तौर पर लेकर दुनिया भर के बाजारों की नजर बनी हुई है क्योंकि यह समुद्री मार्ग कच्चे तेल के सबसे महत्वपूर्ण रास्तों में से एक माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में अगर यहां किसी तरह का सैन्य तनाव या अवरोध पैदा होता है तो वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
कच्चे तेल से कैसे बनते हैं अलग अलग ईंधन
कच्चा तेल सीधे इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसे रिफाइनरी में प्रोसेस किया जाता है। रिफाइनरी में कच्चे तेल को बहुत अधिक तापमान पर गर्म किया जाता है और फिर उसे अलग अलग हिस्सों में बांटा जाता है।
इस दौरान तापमान के आधार पर अलग अलग उत्पाद निकलते हैं।
पेट्रोल
यह हल्का ईंधन होता है जो ऊपरी हिस्से में निकलता है और मुख्य रूप से कार और बाइक में इस्तेमाल किया जाता है।
डीजल
यह पेट्रोल से थोड़ा भारी होता है और ट्रक बस और कई मशीनों में उपयोग किया जाता है।
केरोसिन
मध्यम श्रेणी का ईंधन है जिसका उपयोग पहले घरेलू जरूरतों में अधिक होता था और अब इसका इस्तेमाल विमानन ईंधन बनाने में भी किया जाता है।
LPG गैस
रिफाइनिंग के दौरान निकलने वाली गैस को प्रोसेस कर घरेलू रसोई गैस के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
बिटुमेन और लुब्रिकेंट
सबसे भारी हिस्सा सड़क निर्माण और मशीनों के तेल के रूप में काम आता है।
क्यों बढ़ते हैं तेल के दाम
जब भी तेल उत्पादक क्षेत्रों में तनाव बढ़ता है तो बाजार को डर रहता है कि आपूर्ति कम हो सकती है। यही आशंका कीमतों को तेजी से ऊपर ले जाती है। इसलिए मिडिल ईस्ट में चल रही स्थिति का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दिखाई देने लगता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर पेट्रोल डीजल और गैस की कीमतों पर भी पड़ सकता है। इसलिए वैश्विक बाजार लगातार इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।