सुंदरता की कीमत, दुनिया की 5 परंपराएं जिनमें महिलाओं को सहनी पड़ती है पीड़ा

नई दिल्ली :- दुनिया के कई समाजों में सुंदरता को लेकर अलग-अलग मानदंड बनाए गए हैं। कई जगह ये परंपराएं संस्कृति और पहचान का हिस्सा मानी जाती हैं लेकिन इनके कारण महिलाओं को शारीरिक और मानसिक तकलीफ भी झेलनी पड़ती है। इतिहास और समाजशास्त्र के अध्ययनों में ऐसी कई प्रथाओं का जिक्र मिलता है जो आज भी चर्चा का विषय हैं।

पैर बांधने की प्रथा

प्राचीन चीन में चलने वाली यह परंपरा Foot Binding के नाम से जानी जाती थी। इसमें छोटी उम्र से लड़कियों के पैरों को कसकर बांधा जाता था ताकि उनका आकार छोटा और “आकर्षक” दिखाई दे। इस प्रक्रिया से चलना तक मुश्किल हो जाता था और कई महिलाओं को जीवन भर दर्द झेलना पड़ता था।

गर्दन लंबी करने की परंपरा

म्यांमार और थाईलैंड के कुछ समुदायों में महिलाओं द्वारा गर्दन में धातु के कई छल्ले पहनने की परंपरा देखी जाती है। यह प्रथा Kayan Neck Rings के रूप में जानी जाती है। धीरे-धीरे छल्लों की संख्या बढ़ाई जाती है जिससे गर्दन लंबी दिखाई देती है।

 

होंठ प्लेट की परंपरा

अफ्रीका के कुछ जनजातीय समुदायों में महिलाओं के निचले होंठ में बड़ी प्लेट पहनने की परंपरा है जिसे Lip Plate कहा जाता है। इसे सुंदरता और सामाजिक पहचान का प्रतीक माना जाता है लेकिन इसमें दर्द और संक्रमण का खतरा भी रहता है।

 

त्वचा को हल्का करने की प्रवृत्ति

कई देशों में गोरी त्वचा को सुंदरता से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से Skin Lightening या स्किन ब्लीचिंग का चलन बढ़ा। कई बार इसमें ऐसे रसायनों का इस्तेमाल होता है जो त्वचा और सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।

 

कमर कसने की परंपरा

यूरोप के पुराने दौर में पतली कमर को सुंदरता का प्रतीक माना जाता था। इसके लिए महिलाएं कसे हुए कॉर्सेट पहनती थीं जिसे Corset कहा जाता है। ज्यादा कसाव से सांस लेने में दिक्कत और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी हो सकती थीं।

 

समय के साथ दुनिया के कई हिस्सों में इन प्रथाओं पर सवाल उठे हैं और जागरूकता बढ़ने से कई जगह इनका चलन कम हुआ है। आज सुंदरता को लेकर सोच धीरे-धीरे बदल रही है और महिलाओं की सेहत तथा स्वतंत्रता को अधिक महत्व दिया जाने लगा है।

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