विदेशी धुन से प्रेरित होकर बना मोहम्मद रफी का अमर गीत, 58 साल बाद भी लोगों की जुबान पर

मुंबई (महाराष्ट्र):- हिंदी सिनेमा के पुराने गीतों की लोकप्रियता आज भी बरकरार है। समय बदल गया, संगीत की शैली बदल गई, लेकिन कुछ गीत ऐसे हैं जो पीढ़ियों तक लोगों के दिलों में बसे रहते हैं। महान गायक मोहम्मद रफ़ी की आवाज में गाया गया एक ऐसा ही गीत आज भी उतना ही लोकप्रिय है, जितना अपने समय में था।

करीब 58 वर्ष पहले रिकॉर्ड हुआ यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंद बना हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि इस मशहूर गीत की धुन विदेशी सिनेमा के एक गीत से प्रेरित बताई जाती है। उस समय हिंदी फिल्म संगीत में कई संगीतकार दुनिया भर के संगीत को सुनते और उससे प्रेरणा लेकर नई धुनें तैयार करते थे।

 

बताया जाता है कि इस यादगार गीत को प्रसिद्ध संगीतकार  शंकर जयकिशन ने तैयार किया था। इस जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को अनेक अमर धुनें दीं और उनके संगीत में भारतीयता के साथ-साथ वैश्विक संगीत की झलक भी देखने को मिलती थी। जब यह गीत रिकॉर्ड हुआ तो उसकी मधुर धुन और मोहम्मद रफी की जादुई आवाज ने इसे तुरंत लोकप्रिय बना दिया।

संगीत विशेषज्ञों का मानना है कि उस दौर में फिल्म संगीत केवल मनोरंजन नहीं था, बल्कि एक कला का रूप था। गीतों में गहराई, भावनाएं और सादगी होती थी, जिसके कारण वे लंबे समय तक लोगों के दिलों में बने रहते थे।

आज के समय में भी जब यह गीत रेडियो, संगीत मंचों या किसी कार्यक्रम में बजता है तो लोग उसी उत्साह के साथ इसे सुनते हैं। यही वजह है कि पुराने गीतों को सदाबहार कहा जाता है।

मोहम्मद रफी का नाम भारतीय संगीत इतिहास में हमेशा सम्मान के साथ लिया जाएगा। उनकी आवाज में गाए गए गीत न केवल अपने समय के लोकप्रिय रहे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संगीत की अमूल्य धरोहर बन गए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *