नई दिल्ली। दिल्ली एनसीआर में गैस आपूर्ति पर बढ़ते दबाव के बीच उद्योगों और होटल कारोबारियों को बड़ी राहत मिली है। अस्थायी रूप से वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की अनुमति दे दी है ताकि एलपीजी और प्राकृतिक गैस की कमी के कारण कामकाज प्रभावित न हो।
आयोग के फैसले के अनुसार अब दिल्ली एनसीआर के होटल ढाबे रेस्टोरेंट और उद्योग जरूरत पड़ने पर अन्य ईंधनों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे गैस संकट के दौरान भोजन सेवा और औद्योगिक गतिविधियां जारी रखने में मदद मिलेगी।
इन ईंधनों के इस्तेमाल की अनुमति
आयोग ने जिन वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल की अनुमति दी है उनमें हाई स्पीड डीजल बायोमास आरडीएफ पेलेट्स कोयला मिट्टी का तेल और लकड़ी जैसे ईंधन शामिल हैं। पहले इन ईंधनों के इस्तेमाल पर पर्यावरण कारणों से सख्त पाबंदियां थीं लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अस्थायी राहत दी गई है।
होटल और ढाबा कारोबार को राहत
गैस की कमी के कारण कई होटल ढाबों और रेस्टोरेंट्स को संचालन में परेशानी हो रही थी। वैकल्पिक ईंधन की अनुमति मिलने से उन्हें अपना किचन चालू रखने में आसानी होगी। कारोबारियों का कहना है कि इस फैसले से हजारों लोगों के रोजगार और कारोबार को राहत मिलेगी।
उद्योगों के लिए भी राहत
दिल्ली एनसीआर के कई छोटे और मध्यम उद्योग भी प्राकृतिक गैस पर निर्भर हैं। गैस आपूर्ति प्रभावित होने से उत्पादन पर असर पड़ रहा था। अब वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल से फैक्ट्रियां सीमित स्तर पर ही सही लेकिन काम जारी रख सकेंगी।
अस्थायी व्यवस्था
अधिकारियों का कहना है कि यह अनुमति केवल अस्थायी तौर पर दी गई है। जैसे ही गैस आपूर्ति सामान्य होगी पर्यावरण मानकों के अनुसार फिर से पहले की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से गैस संकट के दौरान आवश्यक सेवाओं और उद्योगों को चलाए रखने में मदद मिलेगी जबकि प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।