नई दिल्ली :- अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर अब भारत के जेम्स और ज्वेलरी उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार भारतीय आभूषण निर्यात में करीब २० प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है।
मध्य पूर्व भारत के लिए आभूषण और हीरा व्यापार का एक बड़ा बाजार है। रिपोर्टों के अनुसार भारत के कुल जेम्स और ज्वेलरी निर्यात का लगभग एक चौथाई हिस्सा इसी क्षेत्र में जाता है। यदि इस क्षेत्र में युद्ध या तनाव बढ़ता है तो ऑर्डर रद्द होने और शिपमेंट में देरी जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं।
संघर्ष के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें और कार्गो मार्ग प्रभावित हुए हैं जिससे कच्चे हीरों और अन्य कीमती पत्थरों की आपूर्ति भी बाधित हो रही है। इससे भारत के हीरा काटने और आभूषण निर्माण उद्योग की उत्पादन प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है।
निर्यातकों का कहना है कि अनिश्चितता के कारण मध्य पूर्व के कई खरीदार नए ऑर्डर देने से बच रहे हैं। साथ ही शिपिंग लागत और बीमा प्रीमियम भी बढ़ गए हैं जिससे व्यापार और महंगा हो गया है। अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहा तो भारत के कुल निर्यात को आठ से दस अरब डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।
इसके अलावा ईंधन की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा का असर ज्वेलरी निर्माण पर भी पड़ रहा है। कुछ शहरों में सोने की कीमतों में तेजी और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण कारीगरों के काम में भी कमी आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व में हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो भारत के जेम्स और ज्वेलरी उद्योग के साथ-साथ अन्य निर्यात क्षेत्रों पर भी इसका असर और गहरा हो सकता है।