नई दिल्ली :- देश की राजनीति एक बार फिर बड़े मोड़ पर खड़ी है क्योंकि पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। इन चुनावों को सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। सबसे ज्यादा नजरें पूर्वी भारत के बड़े राज्य पश्चिम बंगाल पर टिकी हैं जहां सत्ता की जंग बेहद दिलचस्प बनती दिखाई दे रही है। यहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और चुनौती पेश कर रही बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में इस बार मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा हो सकता है। एक तरफ ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है वहीं दूसरी तरफ भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
उधर पूर्वोत्तर के राज्य असम में भी सियासी तापमान तेजी से बढ़ रहा है। यहां कांग्रेस सत्ता में वापसी की उम्मीद के साथ मैदान में उतर रही है। पार्टी का मानना है कि जनता इस बार बदलाव चाहती है इसलिए चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है।
दक्षिण भारत के राज्यों पर भी पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। लंबे समय से दक्षिण में सीमित राजनीतिक प्रभाव रखने वाली बीजेपी इस बार अपने जनाधार को बढ़ाने की कोशिश कर रही है। सवाल यह भी है कि क्या इस बार दक्षिण के किसी राज्य में भाजपा अपना मजबूत खाता खोल पाएगी या फिर क्षेत्रीय दल और पारंपरिक पार्टियां ही बढ़त बनाए रखेंगी।
इन पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का संतुलन तय कर सकते हैं। यही वजह है कि सभी बड़ी पार्टियां अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुकी हैं और जनता का मूड ही तय करेगा कि सत्ता की कुर्सी किसके हिस्से आएगी।