नई दिल्ली :- दिल्ली की सड़कों पर जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विजेंद्र गुप्ता ने उपराज्यपाल को पत्र लिखकर ट्रैफिक सिग्नलों पर “ बोलने वाले सिग्नल” यानी आवाज आधारित सिस्टम लगाने का प्रस्ताव दिया है।
इस सिस्टम के तहत ट्रैफिक सिग्नल केवल लाइट से नहीं बल्कि आवाज के जरिए भी संकेत देंगे। जैसे ही पैदल यात्रियों के लिए रास्ता सुरक्षित होगा तो सिग्नल बीप या किसी खास ध्वनि से बताएगा कि अब सड़क पार की जा सकती है।
क्यों जरूरी है यह बदलाव
दिल्ली में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्हें देखने में परेशानी होती है या जो बुजुर्ग हैं। रिपोर्ट के मुताबिक लाखों लोग विजुअल संकेतों पर निर्भर नहीं रह सकते और उन्हें सड़क पार करने में काफी जोखिम होता है।
ऐसे में यह आवाज आधारित सिस्टम उनके लिए काफी मददगार साबित हो सकता है और सड़क हादसों को भी कम कर सकता है।
दुनिया के कई देशों में पहले से लागू
जापान अमेरिका ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे देशों में यह तकनीक पहले से इस्तेमाल हो रही है। वहां ट्रैफिक सिग्नल पर अलग अलग ध्वनियां या म्यूजिक बजता है जिससे पैदल यात्री आसानी से समझ जाते हैं कि कब चलना सुरक्षित है।
क्या होगा असर
अगर यह योजना लागू होती है तो
दृष्टिबाधित लोगों के लिए शहर ज्यादा सुरक्षित बनेगा
बुजुर्गों को सड़क पार करने में आसानी होगी
दिल्ली एक और स्मार्ट और इनक्लूसिव सिटी की ओर बढ़ेगी
सीधे शब्दों में समझो तो आने वाले समय में सिग्नल सिर्फ “लाल पीला हरा” नहीं रहेगा बल्कि आपको बोलकर भी रास्ता बताएगा।