भारत 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा, जर्मनी को पीछे छोड़कर : दावा

नई दिल्ली :- बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की नई रिपोर्ट ने भारत की आर्थिक प्रगति पर बड़ा दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत २०३० तक जर्मनी को पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इससे पहले भारत ने जापान को नामिनल जीडीपी के आधार पर पीछे छोड़ दिया है और अब चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हो चुका है। यह उपलब्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार और मजबूत नीतियों का नतीजा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस दशक के अंत तक भारत जर्मनी से आगे निकल जाएगा। वर्तमान में भारत चौथे स्थान पर है जबकि जर्मनी तीसरे पर है। भारत की जीडीपी वृद्धि दर लगातार उच्च बनी हुई है जो वैश्विक स्तर पर सबसे तेज मानी जाती है। पिछले तीन दशकों में ६ से ७ प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि ने भारत को आधा ट्रिलियन डॉलर से चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया है। अब यह गति जारी रखते हुए २०३० तक तीसरा स्थान हासिल करने की संभावना मजबूत है।

वृद्धि के प्रमुख कारक मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक नीतियां अनुकूल जनसांख्यिकी बढ़ता उपभोक्ता खर्च और डिजिटल क्रांति हैं। हालांकि रिपोर्ट ने कुछ चुनौतियों पर भी ध्यान दिलाया है। मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में जीडीपी हिस्सेदारी पिछले दशक में १७ प्रतिशत से घटकर १३ प्रतिशत रह गई है। रोजगार सृजन के लिए मैन्यूफैक्चरिंग को मजबूत करना जरूरी है क्योंकि यह सेवा क्षेत्र से ज्यादा रोजगार पैदा करता है। कृषि में वितरण अक्षमता है जहां किसानों को उपभोक्ता मूल्य का केवल २५ प्रतिशत मिलता है।

एआई को अपनाना भी महत्वपूर्ण है। भारतीय कंपनियों को इसे रणनीतिक प्राथमिकता देनी होगी। उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था बनने के लिए शहरों में बुनियादी ढांचा किफायती आवास और सार्वजनिक परिवहन में निवेश बढ़ाना होगा। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में भारी वृद्धि हुई है जो २०१४-१५ में २ लाख करोड़ से बढ़कर २०२६-२७ में १२.२० लाख करोड़ पहुंच गया है।

रिपोर्ट में इन्फ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड और सिटी इकोनॉमिक रीजन्स जैसे नए उपायों का जिक्र है। प्रत्येक सिटी इकोनॉमिक रीजन के लिए ५ वर्षों में ५००० करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। ये कदम निरंतर विकास सुनिश्चित करेंगे।

भारत की यह यात्रा वैश्विक अर्थव्यवस्था में नया अध्याय लिख रही है। मजबूत नीतियां और सुधार जारी रखने से २०३० तक तीसरा स्थान हासिल करना न केवल संभव बल्कि संभावित है। दुनिया अब भारत की आर्थिक शक्ति को नई नजर से देख रही है। यह उपलब्धि करोड़ों भारतीयों के लिए अवसरों का द्वार खोलेगी।

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