लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- राजेश्वर सिंह के हालिया बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने मां गंगा को लेकर दिए गए बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे आस्था और सनातन मर्यादा पर सीधा प्रहार बताया है। उनके अनुसार गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि भारत की आत्मा हैं और इससे जुड़ी भावनाओं को आहत करना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह पूरा विवाद अखिलेश यादव के उस बयान के बाद शुरू हुआ जिसमें गंगा किनारे इफ्तार से जुड़ी टिप्पणी की गई थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राजेश्वर सिंह ने कहा कि ऐसी सोच पहले भी धार्मिक भावनाओं के खिलाफ रही है और इतिहास में इसके उदाहरण देखने को मिलते हैं। उन्होंने अपने बयान में यह भी जोड़ा कि इसी विचारधारा ने पहले रामभक्तों के खिलाफ कठोर कदम उठाए और मंदिर निर्माण का विरोध किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल एक बयान तक सीमित नहीं है बल्कि इसके जरिए धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को केंद्र में लाकर राजनीति को धार देने की कोशिश की जा रही है। गंगा का महत्व भारत में केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक भी है जिससे करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है।
इस बीच समर्थकों और विरोधियों के बीच सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां इसे आस्था की रक्षा का मुद्दा बताया जा रहा है वहीं दूसरी ओर इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण की रणनीति कहा जा रहा है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और इसका प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।