नई दिल्ली :- सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ ने ‘इंडस्ट्री’ शब्द की परिभाषा से जुड़े अहम मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर विस्तृत बहस सुनी कि किन गतिविधियों और संस्थानों को ‘इंडस्ट्री’ की श्रेणी में रखा जाना चाहिए। इस परिभाषा का सीधा असर श्रमिकों के अधिकारों और नियोक्ताओं की जिम्मेदारियों पर पड़ता है।
मामले की अहमियत इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि अलग अलग क्षेत्रों में काम करने वाले संस्थानों को लेकर कई बार भ्रम की स्थिति बनी रहती है। यदि किसी संस्था को ‘इंडस्ट्री’ माना जाता है तो वहां काम करने वाले कर्मचारियों को श्रम कानूनों के तहत विशेष अधिकार मिलते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भविष्य में श्रम कानूनों की व्याख्या को नई दिशा दे सकता है। इससे यह भी तय होगा कि शिक्षा संस्थान अस्पताल और अन्य सेवा क्षेत्र किस हद तक इस परिभाषा में शामिल होंगे।
अब सभी की नजर कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी है जो आने वाले समय में लाखों कर्मचारियों और संस्थानों को प्रभावित कर सकता है।