नई दिल्ली :- भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में बड़ा उलटफेर हुआ है जहां एचडीएफसी बैंक के पार्ट टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर अतनु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा १७ मार्च को लिखा गया और १८ मार्च को तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया। चक्रवर्ती ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा कि पिछले दो सालों में बैंक के अंदर कुछ घटनाएं और कामकाज के तरीके उनके व्यक्तिगत मूल्यों तथा नैतिकता से मेल नहीं खाते। उन्होंने कोई विशिष्ट विवरण नहीं दिया लेकिन इतना जरूर कहा कि इस्तीफे का कोई अन्य भौतिक कारण नहीं है।
एचडीएफसी बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को फाइलिंग में पुष्टि की कि इस्तीफे का आधार केवल पत्र में उल्लिखित है और कोई अन्य वजह नहीं है। बैंक ने उनके योगदान की सराहना की और आरबीआई से अनुमति लेकर केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए अंतरिम पार्ट टाइम चेयरमैन नियुक्त किया है। मिस्त्री एचडीएफसी ग्रुप के वेटरन हैं और बैंक के बोर्ड में पहले से मौजूद हैं। यह नियुक्ति १९ मार्च से प्रभावी है।
चक्रवर्ती २०२१ से बोर्ड में थे और एचडीएफसी लिमिटेड के साथ मर्जर के बाद बैंक की देखरेख में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनका इस्तीफा नैतिक मतभेद पर आधारित होना बैंकिंग सेक्टर में दुर्लभ है और निवेशकों में चिंता पैदा कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह बोर्ड स्तर पर असहमति या आंतरिक मुद्दों का संकेत हो सकता है लेकिन बैंक ने इसे साफ किया कि कोई अन्य फैक्टर नहीं है।
शेयर बाजार पर इसका तुरंत असर दिखा। भारतीय बाजार में एचडीएफसी बैंक का शेयर गुरुवार को ४ से ९ प्रतिशत तक गिरा जबकि अमेरिकी बाजार में बैंक का एडीआर ७ प्रतिशत से अधिक नीचे बंद हुआ। निवेशकों ने करीब एक लाख करोड़ रुपये का नुकसान झेला। बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है और आगे के ट्रेडिंग सेशन पर नजर रखनी होगी।
यह घटना भारत के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक के लिए चुनौतीपूर्ण समय लाई है जहां मर्जर के बाद एकीकरण की प्रक्रिया जारी है। नैतिकता और गवर्नेंस पर सवाल उठने से निवेशक सतर्क हो गए हैं। बैंक ने कहा कि सामान्य कामकाज जारी रहेगा और कोई बड़ा बदलाव नहीं है। फिर भी यह इस्तीफा चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत फैसला है या बैंक के अंदर कुछ गड़बड़ी का संकेत विशेषज्ञों की जांच जारी है। शेयरधारकों के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण रहेगा जहां बाजार की प्रतिक्रिया और अधिक स्पष्ट होगी।