नई दिल्ली :-दुनिया भर में बदलते युद्ध के स्वरूप ने यह साफ कर दिया है कि अब भविष्य की लड़ाई “ड्रोन युद्ध” होगी। हाल ही में रक्षा मंत्री ने भी कहा कि भारत को तुरंत एक मजबूत स्वदेशी ड्रोन इकोसिस्टम की जरूरत है ताकि रणनीतिक आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके।
आज ड्रोन सिर्फ निगरानी तक सीमित नहीं हैं बल्कि हमला करने वाले “कामीकाज़े ड्रोन” और AI आधारित हथियार बन चुके हैं। भारत में भी इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है।
भारत में कौन-कौन सी कंपनियां बनाती हैं सैन्य ड्रोन
🔹 प्रमुख रक्षा और बड़ी कंपनियां
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड
रक्षा क्षेत्र की बड़ी कंपनी जो UAV और सैन्य ड्रोन प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है
लार्सन एंड टुब्रो
हाई-एल्टीट्यूड और लंबे समय तक उड़ने वाले ड्रोन विकसित कर रही है
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड
ड्रोन के लिए सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बनाती है
अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस
रक्षा और UAV टेक्नोलॉजी में तेजी से विस्तार कर रही है
🔹 स्पेशलाइज्ड ड्रोन कंपनियां
ideaForge
भारतीय सेना और पुलिस को सर्विलांस ड्रोन सप्लाई करती है
NewSpace Research
स्वार्म ड्रोन और अटैक ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम
Garuda Aerospace
डिफेंस और इंडस्ट्रियल दोनों सेक्टर में सक्रिय
Asteria Aerospace
ISR यानी निगरानी ड्रोन में मजबूत पकड़
Dhaksha Unmanned Systems
सैन्य और लॉजिस्टिक्स ड्रोन बनाती है
🔹 उभरती और खास टेक कंपनियां
Paras Defence and Space Technologies
ड्रोन कैमरा और UAV सिस्टम विकसित करती है
Zen Technologies
ड्रोन और सैन्य सिमुलेशन सिस्टम
RattanIndia Enterprises
NeoSky के जरिए ड्रोन प्लेटफॉर्म विकसित कर रही
भारत में अटैक ड्रोन भी बन रहे हैं
हाल की रिपोर्ट के अनुसार भारत में “शेषनाग” और “प्रोजेक्ट KAL” जैसे लंबी दूरी के अटैक ड्रोन विकसित किए जा रहे हैं जो 1000 किलोमीटर तक मार कर सकते हैं।
फिर भी क्यों जरूरी है मजबूत ड्रोन इकोसिस्टम
- अभी कई महत्वपूर्ण पार्ट्स विदेश से आते हैं
- AI और स्वार्म टेक्नोलॉजी में गैप है
- बड़े पैमाने पर उत्पादन सीमित है
- युद्ध के समय सप्लाई चेन खतरे में पड़ सकती है
भारत ने ड्रोन टेक्नोलॉजी में अच्छी शुरुआत कर दी है और कई कंपनियां सैन्य ड्रोन बना रही हैं। लेकिन अमेरिका चीन और इजराइल जैसे देशों की बराबरी करने के लिए एक मजबूत और पूरी तरह स्वदेशी ड्रोन इकोसिस्टम बनाना बेहद जरूरी है।अगर यह लक्ष्य हासिल हो जाता है तो भारत भविष्य के युद्धों में न सिर्फ सुरक्षित रहेगा बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भी बड़ी ताकत बन सकता है।