नई दिल्ली: स्वतंत्र भारत के मीडिया इतिहास में शुक्रवार देर शाम एक अभूतपूर्व और विवादास्पद घटना सामने आई, जब देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया (UNI) के रफ़ी मार्ग परिसर को दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के भारी अमले द्वारा बिना किसी पूर्व नोटिस के जबरन खाली कराया गया। यह परिसर कई दशकों से एजेंसी का मुख्य संचालन केंद्र रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अचानक कुछ सरकारी अधिकारी लगभग 300 पुलिसकर्मी, अर्धसैनिक बल के जवान और कुछ वकीलों के साथ परिसर में दाखिल हुए। कर्मचारियों से तुरंत न्यूजरूम खाली करने का दबाव डाला गया। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारी तुरंत बाहर नहीं निकलते हैं तो उन्हें बल प्रयोग करना पड़ेगा।
कर्मचारियों ने समय देने और कंपनी प्रबंधन के आने का इंतजार करने के अनुरोध के साथ नोटिस दिखाने की मांग की। इसके बावजूद महिला कर्मचारियों सहित कई कर्मचारियों को जबरन धक्का देकर और घसीटकर उनकी सीटों से हटाया गया और न्यूजरूम से बाहर निकाल दिया गया। इस दौरान कर्मचारियों के साथ गाली-गलौच भी की गई।
पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने परिसर के गेट पर कब्जा कर लिया और बाहर समाचार जुटाने गए पत्रकारों तथा प्रबंधन के अधिकारियों को परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया। कर्मचारियों को अपने व्यक्तिगत सामान तक नहीं लेने दिया गया।
विशेषज्ञों और पत्रकार संगठनों ने इस घटना को प्रेस स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। स्वतंत्र मीडिया लोकतंत्र की रीढ़ है और इस तरह की कार्रवाई से देश में लोकतंत्र और मीडिया के बीच संतुलन पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
सोशल मीडिया और पत्रकार समुदाय ने इस कार्रवाई की तीखी निंदा की है और प्रेस स्वतंत्रता की सुरक्षा की मांग उठाई है। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत में स्वतंत्र पत्रकारिता को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है।