नई दिल्ली :- नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में संबोधन के दौरान मिडिल ईस्ट की स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी गंभीर प्रभाव डाल रहा है।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट “अस्वीकार्य” है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ है और इसके प्रभावित होने से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है।
पीएम मोदी ने कहा कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। इसका सीधा असर तेल की कीमतों और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ रहा है, जिससे भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि भारत शांति, संवाद और कूटनीतिक समाधान का समर्थक है। भारत का मानना है कि सभी पक्षों को संयम बरतते हुए बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए।भारत के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार है।प्रधानमंत्री का यह बयान दर्शाता है कि भारत वैश्विक घटनाक्रमों को लेकर सतर्क है और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के पक्ष में खड़ा है।