नई दिल्ली :- संसद में हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 74 दिनों में देशभर में पुलिस और न्यायिक हिरासत में कुल 170 मौतें हुई हैं। यह आंकड़ा हिरासत में मौतों के बढ़ते ग्राफ को दर्शाता है और मानवाधिकारों के क्षेत्र में चिंता का विषय बना हुआ है।
🔹 आंकड़ों का विश्लेषण
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, विभिन्न राज्यों में पुलिस हिरासत और न्यायिक हिरासत में मौतों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
मौतों में मुख्य कारण स्वास्थ्य समस्याएं, हिरासत की परिस्थितियां और कथित आत्महत्या बताई जा रही हैं।
आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि कई मामले ऐसे हैं जहां हिरासत के दौरान पर्याप्त चिकित्सा सहायता नहीं मिल पाई।
⚡ सांसदों की चिंता
संसद में इस ग्राफ को लेकर कई सांसदों ने चिंता व्यक्त की और पुलिस और न्यायिक हिरासत में सुधार की मांग उठाई।
मुख्य मुद्दे:
1. हिरासत के दौरान मानवाधिकारों की सुरक्षा
2. उचित चिकित्सा और निगरानी की व्यवस्था
3. हिरासत में मौतों के मामलों में तत्काल और पारदर्शी जांच
🧠 विशेषज्ञों की राय
मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि हिरासत में मौतों में कमी लाने के लिए पुलिस और जेल प्रशासन में प्रशिक्षण और मॉनिटरिंग को बढ़ाना होगा। साथ ही, हिरासत में स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित जांच और पारदर्शिता जरूरी है।
समयावधि: पिछले 74 दिन
मौतें: 170 (पुलिस और न्यायिक हिरासत)
मुख्य कारण: स्वास्थ्य समस्याएं, हिरासत की परिस्थितियां, आत्महत्या की आशंका
संसद में चिंता: मानवाधिकारों की सुरक्षा, जांच और सुधार की मांग
विशेषज्ञ सुझाव: प्रशिक्षण, मॉनिटरिंग और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार