पणजी (गोवा ):- भाजपा पार्षद सुषांत नायक के पुत्र सोहम नायक की उम्र बीस वर्ष है। गोवा में उसे नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उसने पच्चीस से अधिक नाबालिग लड़कियों का शोषण किया। उसने इन घटनाओं को रिकॉर्ड किया। उसने पीड़िताओं को ब्लैकमेल किया। उसने वीडियो को सर्कुलेट भी किया। यह घटना अत्यंत शर्मनाक और घिनौनी है। भाजपा से सीधे जुड़े ऐसे लोगों की लंबी सूची है। इसलिए वास्तविक प्रश्न यह उठता है कि इन शिकारियों को ऐसे जघन्य अपराध करने का साहस कहां से मिलता है।
क्या सत्ता का संरक्षण उन्हें यह विश्वास दिलाता है कि वे अछूते हैं। हां सत्ता की छाया में ये लोग खुद को छूने योग्य नहीं समझते। वे सोचते हैं कि राजनीतिक रक्षा कवच के कारण कोई उन्हें सजा नहीं दे पाएगा। यह धारणा उन्हें और भी दुस्साहसी बनाती है। समाज में सत्ता से जुड़े लोग अक्सर कानून को अपनी मुट्ठी में समझते हैं। वे जानते हैं कि उनकी पार्टी उन्हें बचाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। इसीलिए वे नाबालिगों जैसे कमजोर वर्ग पर हमला बोलते हैं। पीड़िताओं के जीवन बर्बाद हो जाते हैं। लेकिन अपराधी बेखौफ घूमते रहते हैं। भाजपा जैसी पार्टियों में ऐसे मामलों की भरमार है। इससे साबित होता है कि सत्ता का दुरुपयोग अपराध को बढ़ावा देता है। हमें इस स्थिति को बदलना चाहिए। कानून को सभी पर समान रूप से लागू करना चाहिए। सत्ता का संरक्षण किसी को भी अपराध करने का लाइसेंस नहीं देना चाहिए। अगर हम इस पर अंकुश नहीं लगाएंगे तो और अधिक निर्दोष बच्चे शिकार बनेंगे।
समाज को जागरूक होना चाहिए। राजनीतिक दलों को ऐसे तत्वों से दूरी बनानी चाहिए। तभी न्याय की स्थापना होगी। यह समस्या केवल एक घटना तक सीमित नहीं है। पूरे देश में राजनीतिक संरक्षण के कारण अपराध बढ़ रहे हैं। नाबालिगों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून हैं लेकिन अमल में कमी है। जब अपराधी सत्ता से जुड़ा होता है तो केस कमजोर हो जाते हैं। सोहम नायक जैसे लोग इसी भरोसे पर काम करते हैं। वे जानते हैं कि वीडियो रिकॉर्ड करके ब्लैकमेल करने से पीड़ित चुप रहेंगी। लेकिन अब गिरफ्तारी हुई है तो उम्मीद है कि न्याय मिलेगा। फिर भी सवाल वही है कि साहस की जड़ क्या है। यह जड़ सत्ता का दुरुपयोग है। सत्ता से जुड़कर लोग खुद को भगवान समझने लगते हैं। वे नियमों को तोड़ते हैं और सोचते हैं कि कोई पकड़ नहीं सकेगा। यह सोच उन्हें और अधिक अपराध करने के लिए उकसाती है। देश की राजनीति में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां सत्ता का लाभ उठाकर लोग जघन्य कृत्य करते हैं। भाजपा में भी यह देखा गया है। इसलिए इस पार्टी से क्या उम्मीद की जा सकती है जब उसके नेता के बेटे जैसे लोग शामिल हैं। समाज को इस पर विचार करना चाहिए। क्या हमें ऐसे लोगों को सत्ता देनी चाहिए जो कानून का सम्मान नहीं करते। सत्ता का मतलब सेवा है न कि शोषण। लेकिन दुर्भाग्यवश कुछ लोग इसे शोषण का हथियार बनाते हैं। अंत में कह सकते हैं कि अपराधियों को साहस सत्ता से मिलता है। और सत्ता का संरक्षण उन्हें अछूत बना देता है। इसे रोकने के लिए सिस्टम में बदलाव जरूरी है।