नई दिल्ली: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचता दिख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष के कारण MRI स्कैन में देरी की समस्या सामने आ सकती है, जिसकी मुख्य वजह हीलियम गैस की कमी है।
MRI मशीन और हीलियम का क्या है संबंध
MRI (Magnetic Resonance Imaging) मशीनें अत्यधिक शक्तिशाली मैग्नेट पर काम करती हैं। इन मैग्नेट को बेहद कम तापमान पर ठंडा रखने के लिए लिक्विड हीलियम की जरूरत होती है। अगर हीलियम उपलब्ध न हो, तो MRI मशीनें सही तरीके से काम नहीं कर पातीं।
मध्य पूर्व पर निर्भर है हीलियम सप्लाई
दुनिया में हीलियम का बड़ा हिस्सा प्राकृतिक गैस से निकाला जाता है, और इसमें मध्य पूर्व के देशों की अहम भूमिका है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का युद्ध या तनाव उत्पादन और सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।
युद्ध से सप्लाई चेन पर असर
अगर संघर्ष बढ़ता है, तो:
गैस प्लांट और उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं
समुद्री रास्तों (जैसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) पर खतरा बढ़ सकता है
हीलियम की वैश्विक सप्लाई कम हो सकती है
इसका सीधा असर कीमतों और उपलब्धता पर पड़ता है।
अस्पतालों पर क्या होगा असर
हीलियम की कमी होने पर:
MRI मशीनों का संचालन सीमित हो सकता है
मरीजों को स्कैन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है
गंभीर बीमारियों की जांच में देरी हो सकती है
निष्कर्ष
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव सिर्फ तेल या राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं जैसे अहम क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है। यदि स्थिति लंबी खिंचती है, तो MRI स्कैन जैसी जरूरी सुविधाओं में देरी आम बात हो सकती है।